भारत-पाक साझा विरासत पर नई बहस: 20 साल बाद लाहौर की छतें हुई रंगीन, बसंत में फिर झूमा पकिस्तान
लाहौर में करीब 20 साल बाद बसंत पतंग उत्सव की वापसी ने शहर के आसमान को रंगों से भर दिया। सख्त सुरक्षा नियमों के तहत आयोजित इस उत्सव ने सांस्कृतिक पहचान, आर्थिक गतिविधियों और भारत-पाक साझा विरासत पर नई चर्चा छेड़ दी।

बसंत - लाहौर
लगभग दो दशकों की लंबी खामोशी के बाद पाकिस्तान के सांस्कृतिक केंद्र लाहौर में बसंत पतंग उत्सव की वापसी ने न सिर्फ शहर के आसमान को रंगों से भर दिया, बल्कि दक्षिण एशिया के सांस्कृतिक विमर्श में भी नई हलचल पैदा कर दी। वह बसंत, जिसे कभी लाहौर की पहचान माना जाता था, अब सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ फिर से जीवंत हुआ है।
लाहौर में फरवरी 2026 की शुरुआत में तीन दिनों तक चले इस उत्सव के दौरान शहर की छतों, खुले मैदानों और तयशुदा इलाकों में रंग-बिरंगी पतंगें, ढोल-नगाड़ों की गूंज और उत्सवधर्मी भीड़ देखने को मिली। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, कई पीढ़ियों के लोग इस पारंपरिक उत्सव के माध्यम से एक बार फिर वसंत ऋतु का स्वागत करते नजर आए। बसंत को लंबे समय तक प्रतिबंधित रखने के बाद यह दृश्य शहर के लिए भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
A quarter century on, Basant proved Lahore’s spirit was only paused, never broken.This wasn’t the end of Basant; it was the return of Lahore 🩷 pic.twitter.com/y0wBO49XD5
— Maryam Nawaz Sharif (@MaryamNSharif) February 8, 2026
गौरतलब है कि बसंत उत्सव पर करीब 18 से 20 वर्षों तक प्रतिबंध रहा। इसकी वजह पतंगबाजी में इस्तेमाल होने वाली खतरनाक धातु या कांच-लेपित डोर से जुड़ी गंभीर दुर्घटनाएं और जानलेवा हादसे थे। इन्हीं सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने इस बार उत्सव की अनुमति बेहद सख्त नियमों और निगरानी व्यवस्था के तहत दी।
सरकार द्वारा लागू किए गए प्रमुख सुरक्षा उपायों में शामिल हैं—
- धातु और कांच-लेपित डोर पर पूर्ण प्रतिबंध
- केवल सूती धागे के उपयोग की अनुमति
- पतंगों के आकार और वजन की सीमा तय करना
- पतंग उड़ाने के लिए चिन्हित और निगरानी वाले क्षेत्र
- पतंग बनाने और बेचने वालों का पंजीकरण
प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी। अधिकारियों के अनुसार, इन्हीं उपायों के चलते इस आयोजन को “सुरक्षित बसंत” के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। हालांकि, उत्सव की आधिकारिक अवधि समाप्त होने के बाद सामान्य दिनों में पतंग उड़ाने पर अब भी पाबंदी बनी रहेगी और उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान रहेगा।
बसंत की वापसी ने लाहौर की अर्थव्यवस्था को भी स्पष्ट रूप से गति दी। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से पर्यटन, स्थानीय बाजार, खान-पान, संगीत और सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा मिला। होटल, रेस्तरां और पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े कारोबारियों के लिए यह उत्सव आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हुआ। पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने नागरिकों की जिम्मेदार भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि बसंत की वापसी लाहौर की सांस्कृतिक आत्मा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। लंबे अंतराल के बाद लौटे इस उत्सव ने यह संकेत दिया है कि परंपरा और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाकर सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित किया जा सकता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
