नेपाल की अंतरिम सरकार का गठन, सुशीला कार्की ने ली प्रधानमंत्री पद की शपथ
नेपाल ने इतिहास रचते हुए पहली बार किसी महिला को प्रधानमंत्री बनाया है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने शपथ लेकर अंतरिम सरकार की कमान संभाल ली है।

नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। शुक्रवार (12 सितंबर, 2025) को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। शीतल निवास में हुए शपथग्रहण समारोह में नेपाल के उपराष्ट्रपति रामसहाय यादव, प्रधान न्यायाधीश प्रकाश सिंह रावत, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. बाबूराम भट्टराई, सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल, मुख्य सचिव एकनारायण अर्याल और काठमांडू के मेयर बालेन शाह मौजूद रहे। इस अवसर पर कार्की के पति दुर्गा सुवेदी भी शामिल हुए।
तीन सदस्यीय मंत्रिमंडल की तैयारी :
शपथ ग्रहण के साथ ही अंतरिम सरकार के गठन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, सुशीला कार्की के नेतृत्व में तीन से चार सदस्यीय मंत्रिमंडल तैयार किया जा रहा है। इसमें बालानंद शर्मा, कुलमान घीसिंग और ओम प्रकाश आर्यल को मंत्री बनाए जाने की संभावना है। साथ ही सुदन गुरुंग का नाम भी चर्चा में है। यह छोटा मंत्रिमंडल अस्थायी रूप से प्रशासन की कमान संभालेगा और नए चुनाव तक शासन चलाएगा।
पहली कैबिनेट बैठक और चुनाव प्रस्ताव :
शपथ के तुरंत बाद अंतरिम कैबिनेट की पहली बैठक हुई। इस बैठक में सबसे बड़ा फैसला आम चुनाव की तारीख तय करने को लेकर था। अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने बैठक में प्रस्ताव रखा कि नेपाल में 4 मार्च 2026 को आम चुनाव कराया जाए। अधिकारियों का कहना है कि छह महीने के भीतर राष्ट्रीय चुनाव की औपचारिक घोषणा की जाएगी। यह कदम हाल के राजनीतिक संकट और विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थिरता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कार्की का न्यायिक कार्यकाल और पहचान :
सुशीला कार्की का नाम नेपाल के न्यायिक और राजनीतिक इतिहास में एक खास पहचान रखता है। साल 2016 में वे नेपाल सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनी थीं। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई राजनीतिक रूप से संवेदनशील और सामाजिक रूप से प्रभावशाली फैसले दिए। न्यायपालिका में उनकी सख्त और निष्पक्ष छवि ने उन्हें युवाओं और नागरिक समाज के बीच भरोसेमंद चेहरा बनाया। यही कारण है कि हालिया संकट के बीच उन्हें अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया।
ओली सरकार का पतन और जेन-जेड आंदोलन :
यह नियुक्ति उस समय हुई जब केपी शर्मा ओली को हालिया प्रदर्शनों के दबाव में इस्तीफा देना पड़ा। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर देशभर में ‘जेन-जेड’ आंदोलन उभरा। 8 और 9 सितंबर को हुए प्रदर्शनों में हिंसा भड़क गई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे की मांग की और अंततः उन्हें पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद ही राष्ट्रपति पौडेल ने प्रतिनिधि सभा को भंग कर अंतरिम सरकार का रास्ता साफ किया।
स्थिरता की ओर कदम :
नेपाल में लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। बार-बार सरकार बदलने और संसद भंग होने से आम जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा था। ऐसे में सुशीला कार्की का अंतरिम प्रधानमंत्री बनना देश के लिए नई शुरुआत माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में उम्मीद की जा रही है कि आगामी आम चुनाव तक शांति और स्थिरता कायम रहेगी।
कुल मिलाकर, नेपाल की अंतरिम सरकार के गठन के साथ ही देश की राजनीति ने नया मोड़ लिया है। पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं सुशीला कार्की अब पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में इतिहास रच चुकी हैं। आने वाले चुनाव तक उनका कार्यकाल न केवल नेपाल के भविष्य की दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी साबित करेगा कि क्या राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा देश स्थिर शासन की ओर बढ़ सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
