नेपाल में सत्ता परिवर्तन: सुशीला कार्की बनीं अंतरिम प्रधानमंत्री, पीएम मोदी ने दी बधाई



नेपाल की राजनीति एक बड़े मोड़ पर पहुँच गई है। सोशल मीडिया बैन के खिलाफ 8 सितंबर से शुरू हुआ GenZ आंदोलन इतना उग्र हो गया कि हालात नियंत्रण से बाहर होने लगे। बढ़ती हिंसा और अस्थिरता के बीच आखिरकार प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। उनके पद छोड़ने के बाद नेपाल में अंतरिम सरकार बनाने का रास्ता खुला और देश की बागडोर पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को सौंपी गई।



12 सितंबर को शपथ ग्रहण :


73 वर्षीय सुशीला कार्की ने शुक्रवार (12 सितंबर 2025) को नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वह नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बनी हैं। उनके नाम का प्रस्ताव स्वयं GenZ आंदोलनकारियों ने रखा था और आर्मी चीफ तक यह मांग पहुँचाई थी। कई दिनों तक चली खींचतान और राजनीतिक अस्थिरता के बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने दबाव में आकर कार्की को शपथ दिलाई।



पीएम मोदी का पहला रिएक्शन :


भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुशीला कार्की को बधाई देते हुए कहा कि भारत नेपाल की प्रगति और समृद्धि के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा – “नेपाल की अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री के रूप में पद ग्रहण करने पर माननीय सुशीला कार्की जी को हार्दिक शुभकामनाएं। नेपाल के भाई-बहनों की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए भारत पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।” यही नहीं, पीएम मोदी ने नेपाली भाषा में भी ट्वीट कर कार्की को शुभकामनाएँ दीं।


भारत समर्थक मानी जाती हैं कार्की :


राजनीतिक हलकों में माना जाता है कि सुशीला कार्की भारत समर्थक विचारधारा रखती हैं। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को चीन का समर्थक माना जाता था। कार्की पहले भी पीएम नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की तारीफ कर चुकी हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह मोदी से प्रभावित हैं और उनकी कार्यप्रणाली को नेपाल के लिए प्रेरणादायक मानती हैं।


GenZ आंदोलनकारियों की डिमांड पर सहमति :


अंतरिम प्रधानमंत्री बनने के बाद सुशीला कार्की ने आंदोलनकारियों की कुछ प्रमुख मांगें मान ली हैं:

  • नेपाल में अगले 6 से 12 महीने के भीतर चुनाव कराए जाएँगे।
  • नेपाल की संसद को भंग कर दिया गया है और अब कमान अंतरिम सरकार के हाथों में है।
  • सरकार में नागरिक और सेना दोनों का प्रतिनिधित्व होगा।
  • पुराने दलों और नेताओं की संपत्ति की जांच के लिए एक शक्तिशाली न्यायिक आयोग बनेगा।
  • आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच होगी और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।



संविधान से बाहर उठाया गया कदम :


हालांकि नेपाल के संविधान में यह प्रावधान है कि कोई भी पूर्व जस्टिस राजनीतिक पद नहीं ले सकता। इसके बावजूद जनता और खासतौर पर GenZ आंदोलनकारियों की मांग को देखते हुए राष्ट्रपति पौडेल को झुकना पड़ा। नेपाल में मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि आने वाले महीनों में राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल सकता है। लेकिन फिलहाल सबकी नज़रें सुशीला कार्की पर हैं, जो इस कठिन समय में नेपाल की कमान संभाल रही हैं। भारत और नेपाल के रिश्तों में भी नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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