इस्लामाबाद 2.0 वार्ता पर संशय; अमेरिकी सैन्य विमानों की लैंडिंग के बीच ईरान ने बातचीत से किया इनकार
इस्लामाबाद 2.0 वार्ता से पहले US सैन्य विमानों की लैंडिंग, लेकिन ईरान ने बातचीत से किया इनकार। शी जिनपिंग ने हॉर्मुज की सुरक्षा पर दिया जोर। पूरी रिपोर्ट यहाँ।

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन
Islamabad 2.0 peace talks US Iran 2026 : मध्य पूर्व में जारी तनाव को शांत करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी में होने वाली बहुप्रतीक्षित 'इस्लामाबाद 2.0' वार्ता से ठीक पहले वैश्विक कूटनीति के गलियारों में सस्पेंस गहरा गया है। एक तरफ जहाँ अमेरिकी वायुसेना के विशालकाय C-17 विमान साजो-सामान के साथ इस्लामाबाद के नूरखान एयरबेस पर दस्तक दे चुके हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान ने इस वार्ता की संभावनाओं पर ठंडे पानी की बौछार कर दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बागची ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका के साथ अगले दौर की बातचीत की न तो कोई ठोस योजना है और न ही किसी समय-सीमा पर सहमति बनी है। तेहरान का यह बयान उस वक्त आया है जब दुनिया इस वार्ता को युद्ध समाप्ति की दिशा में एक निर्णायक कदम मान रही थी।
इस्लामाबाद में कूटनीतिक हलचल तब और बढ़ गई जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा और संचार के लिए नौ सैन्य विमानों का बेड़ा पाकिस्तान पहुंचा। रिपोर्टों के अनुसार, दो विमानों के जरिए प्रतिनिधिमंडल के वीवीआईपी काफिले की गाड़ियाँ उतारी गईं, जबकि शेष सात विमानों में अत्याधुनिक जैमर, संचार उपकरण और हथियार शामिल हैं। एयरफोर्स-2 वीवीआईपी विमान के भी शाम 4 बजे लैंड करने के साथ ही अमेरिकी खेमे ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। हालांकि, इन भारी सुरक्षा तैयारियों के बीच ईरान की अनिच्छा ने वार्ता की मेज पर सवालिया निशान लगा दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के भीतर से विरोधाभासी लेकिन महत्वपूर्ण स्वर भी उभर रहे हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सार्वजनिक मंचों से अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करने की भावुक अपील की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान को अपनी अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए शांति की आवश्यकता है। पेजेश्कियन ने नेतृत्व में पारदर्शिता और ईमानदारी का आह्वान करते हुए यह संकेत दिया है कि ईरानी शासन के भीतर युद्ध की थकान और जनता की नाराजगी का दबाव साफ महसूस किया जा रहा है।
वैश्विक शक्तियों के हस्तक्षेप ने इस मामले को और भी जटिल बना दिया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से बातचीत के दौरान 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' की सुरक्षा और जहाजों की निर्बाध आवाजाही पर जोर देकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। बीजिंग ने स्पष्ट किया है कि वह व्यापक युद्धविराम का पक्षधर है और संकट का एकमात्र समाधान कूटनीति में देखता है। दूसरी ओर, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इजरायल के साथ संभावित वार्ता के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल की घोषणा कर दी है, जिसका नेतृत्व पूर्व राजदूत सिमोन कराम करेंगे।
वर्तमान परिस्थितियाँ दर्शाती हैं कि मध्य पूर्व का भविष्य अब केवल इस्लामाबाद की बंद कमरों की बैठकों पर नहीं, बल्कि ईरान और अमेरिका के बीच आपसी विश्वास की बहाली पर टिका है। यदि 21 अप्रैल की डेडलाइन से पहले कोई कूटनीतिक सफलता नहीं मिली, तो हथियारों और जैमरों से लैस ये विमान शांति के बजाय एक और बड़े संघर्ष की आहट साबित हो सकते हैं। आने वाले 24 घंटे वैश्विक शांति के लिए अत्यंत निर्णायक होने वाले हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
