अमेरिका में बिना NEET परीक्षा से कैसे बनते है डॉक्टर ? जानें क्या है फीस और प्रक्रिया
अमेरिका के हार्वर्ड और स्टैनफर्ड जैसे संस्थानों में भारतीय छात्र बिना नीट परीक्षा के एमडी कोर्स में दाखिला ले सकते हैं, जानें क्या है पूरी प्रक्रिया।

अमेरिका के मेडिकल कॉलेज में अध्ययन करते अंतरराष्ट्रीय छात्रों का एक प्रतीकात्मक चित्रण।
US top medical colleges fees : अगर आप डॉक्टर बनने का जुनून रखते हैं और भारतीय मेडिकल कॉलेजों की गलाकाट प्रतिस्पर्धा से इतर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं, तो संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) आपके लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल सकता है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अमेरिका को विश्व का 'स्वर्ण मानक' माना जाता है। यहाँ की शिक्षण पद्धति, अत्याधुनिक रिसर्च और करियर के अवसर इसे भारतीय छात्रों की पहली पसंद बनाते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थानों में चिकित्सा की पढ़ाई करने के लिए आपको भारत की चुनौतीपूर्ण 'NEET' परीक्षा के स्कोर की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, यहाँ दाखिला लेने की राह जितनी रोमांचक है, उतनी ही जटिल और खर्चीली भी है।
अमेरिका में चिकित्सा शिक्षा का स्वरूप: MBBS नहीं, MD है डिग्री
भारत में जहाँ छात्र 12वीं के तुरंत बाद सीधे MBBS कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं, वहीं अमेरिका की शिक्षा प्रणाली बिल्कुल अलग है। यहाँ सीधे मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिलता। डॉक्टर बनने के इच्छुक छात्रों को सबसे पहले चार साल का 'बैचलर्स' (Undergraduate) कोर्स पूरा करना अनिवार्य होता है, जिसमें बायोलॉजी और केमिस्ट्री जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस आधारभूत डिग्री के बाद छात्रों को MCAT (Medical College Admission Test) नामक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। इसी परीक्षा के अंकों के आधार पर मेडिकल स्कूल में प्रवेश मिलता है। अमेरिका में मिलने वाली मेडिकल डिग्री को MD (Doctor of Medicine) कहा जाता है, जो भारतीय MBBS के समकक्ष है।
विदेशी छात्रों के लिए अवसर और टॉप मेडिकल संस्थान :
अमेरिका में कुल 155 से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए केवल 53 संस्थानों के दरवाजे खुलते हैं। इनमें से कुछ संस्थान अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं:
- हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) : 1782 में स्थापित यह संस्थान दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल स्कूल है। यहाँ चयन दर मात्र 3% है और सालाना फीस लगभग 77.50 लाख रुपये है।
- यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया (UPenn) : यह अमेरिका का सबसे पुराना मेडिकल कॉलेज है (1765)। बायोमेडिकल रिसर्च के लिए मशहूर इस संस्थान की फीस करीब 79 लाख रुपये प्रति वर्ष है।
- येल यूनिवर्सिटी (Yale University) : यहाँ व्यक्तिगत मार्गदर्शन पर जोर दिया जाता है और हर साल केवल 100 छात्रों को प्रवेश मिलता है। इसकी सालाना फीस 76 लाख रुपये के आसपास है।
- जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी : रिसर्च पर सबसे अधिक निवेश करने वाला यह संस्थान अपने क्लिनिकल प्रशिक्षण के लिए जाना जाता है। यहाँ की फीस लगभग 69.50 लाख रुपये है।
- स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी: कैलिफोर्निया स्थित यह स्कूल नवाचार और प्रैक्टिकल अनुभव के लिए श्रेष्ठ माना जाता है, जिसकी सालाना फीस 66 लाख रुपये है।
कानूनी लाभ : भारत में प्रैक्टिस के लिए आसान राह
अमेरिकी चिकित्सा डिग्री का एक बड़ा कानूनी लाभ भारतीय छात्रों को मिलता है। यदि कोई भारतीय छात्र अमेरिका से MD की डिग्री लेता है और वहीं अपनी 'रेजीडेंसी' (Postgraduation) पूरी कर लेता है, तो उसे भारत लौटकर डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए FMGE (Foreign Medical Graduate Examination) की कठिन परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होती। यह नियम छात्रों के करियर के कई साल बचाता है और उन्हें सीधे भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली में योगदान देने की अनुमति देता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
