MEA का कड़ा रुख: अमेरिका के दावे 'सटीक नहीं', ट्रेड डील के करीब था भारत; जानें 8 फोन कॉल्स का रहस्य
US-India Trade Deal विवाद : विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कॉमर्स मिनिस्टर हॉवर्ड लुटनिक के 'फोन कॉल' वाले दावे को खारिज करते हुए बड़ा खुलासा किया है। MEA के अनुसार, 2025 में पीएम मोदी और ट्रंप के बीच 8 बार बातचीत हुई। जानें क्यों फंसी है ट्रेड डील और 50% अमेरिकी टैरिफ की धमकी पर भारत ने क्या दिया कूटनीतिक जवाब। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

US-India Trade Deal Controversy : भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों की गहराई और प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर वॉशिंगटन से आए एक सनसनीखेज बयान ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अमेरिकी कॉमर्स मिनिस्टर हॉवर्ड लुटनिक द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 'फोन न करने' का आरोप लगाए जाने के बाद, भारत सरकार ने अत्यंत सख्त और स्पष्ट लहजे में अपनी प्रतिक्रिया दी है। लुटनिक ने एक पॉडकास्ट के दौरान दावा किया था कि द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरी तरह तैयार होने के बावजूद केवल इसलिए अधूरा रह गया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अंतिम संवाद के लिए कॉल नहीं किया। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस चित्रण को न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है, बल्कि इसे वास्तविकता से कोसों दूर करार देते हुए कूटनीतिक मर्यादा का आईना दिखाया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से इन दावों की हवा निकालते हुए खुलासा किया कि साल 2025 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आठ बार फोन पर विस्तृत चर्चा हुई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इन बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापारिक हितों सहित द्विपक्षीय साझेदारी के तमाम व्यापक पहलुओं पर विमर्श किया था। भारत का रुख साफ है कि 13 फरवरी 2025 से शुरू हुई यह वार्ता प्रक्रिया एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते के लिए थी, न कि किसी एक पक्ष के दबाव में। विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि कई मौकों पर दोनों पक्ष समझौते के बेहद करीब पहुंचे थे, लेकिन अमेरिकी पक्ष द्वारा चर्चाओं का जो विवरण अब पेश किया जा रहा है, वह पूरी तरह निराधार है।
वर्तमान में इस कूटनीतिक गतिरोध का सबसे बड़ा असर व्यापारिक शुल्कों पर पड़ रहा है, जहाँ भारत वर्तमान में 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहा है। अमेरिकी कॉमर्स मिनिस्टर लुटनिक के अनुसार, डील की विफलता के कारण भारत पर यह भारी शुल्क थोपा गया है। हालांकि, भारत ने अपनी 'पूरक अर्थव्यवस्थाओं' (Complementary Economies) के सिद्धांत पर अडिग रहते हुए कहा है कि वह अभी भी एक ऐसे समझौते के लिए प्रतिबद्ध है जो दोनों देशों की आर्थिक गरिमा और हितों की रक्षा करे। यह विवाद उस समय उपजा है जब वैश्विक व्यापारिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और टैरिफ नीतियों पर किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
भारत और अमेरिका के संबंधों में यह ताज़ा तनाव यह दर्शाता है कि व्यापारिक हितों की लड़ाई अब कूटनीतिक स्तर पर 'बयानबाजी के युद्ध' में बदल चुकी है। विदेश मंत्रालय का यह जवाब वैश्विक मंच पर भारत के उस बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक है, जहाँ वह अपने नेतृत्व के प्रति किए गए किसी भी भ्रामक दावे को बिना चुनौती दिए नहीं छोड़ता। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या लुटनिक के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक वार्ता फिर से पटरी पर लौटती है या टैरिफ की यह दीवार और ऊंची होती जाएगी। अंततः, भारत ने साफ कर दिया है कि द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद ठोस तथ्यों और आपसी सम्मान पर टिकी होनी चाहिए, न कि एकतरफा दावों पर।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
