Masoud Pezeshkian Peace Proposal : पश्चिम एशिया के आसमान में मंडराते मिसाइलों के साये और बारूद की गंध के बीच कूटनीति के गलियारों से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। महीनों से जारी भीषण रक्तपात और तनाव के बाद ईरान ने पहली बार नरमी के संकेत देते हुए अमेरिका के साथ इस युद्ध को समाप्त करने की 'जरूरी इच्छाशक्ति' प्रकट की है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक ऐतिहासिक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि तेहरान अब संघर्ष को और अधिक खींचने के पक्ष में नहीं है, बशर्ते अमेरिका उनकी संप्रभुता और सुरक्षा की पुख्ता गारंटी दे।

इस कूटनीतिक हलचल में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की कि उन्हें अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ की ओर से एक सीधा संदेश (Direct Message) प्राप्त हुआ है। दशकों की कटुता के बाद यह पहला अवसर है जब दोनों धुर विरोधी देशों के बीच पर्दे के पीछे नहीं, बल्कि सीधी बातचीत की सुगबुगाहट हुई है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष के साथ फोन पर हुई चर्चा में राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने जोर देकर कहा कि ईरान शांति के लिए तैयार है, लेकिन कोई भी समझौता ईरानी जनता के हितों और भविष्य में होने वाले संभावित विदेशी आक्रमणों को रोकने की ठोस गारंटी के बिना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

एक ओर जहाँ ईरान शांति की मेज सजाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख अब भी आक्रामक और विनाशकारी बना हुआ है। 'द न्यूयॉर्क पोस्ट' को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने दोटूक कहा कि उनकी सेना वर्तमान में ईरान की हमलावर क्षमता को 'मिटाने' के अभियान पर है। ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका इस युद्ध को अनंत काल तक नहीं चलाना चाहता, लेकिन खर्ग आइलैंड जैसे महत्वपूर्ण ईरानी तेल केंद्रों को निशाना बनाकर वे तेहरान की आर्थिक और सैन्य कमर पूरी तरह तोड़ देना चाहते हैं। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी क्षेत्र में हजारों अतिरिक्त सैनिकों और मरीन यूनिट्स की तैनाती कर आने वाले दिनों को 'निर्णायक' करार दिया है।

युद्ध के मैदान की हकीकत फिलहाल कूटनीतिक दावों से कोसों दूर नजर आती है। पिछले सप्ताह ही ईरान ने ट्रंप के 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। भारी नुकसान उठाने के बावजूद तेहरान का शासन तंत्र और उसकी मिसाइल दागने की क्षमता अब भी बरकरार है, जो उसे बातचीत की मेज पर सौदेबाजी की ताकत प्रदान करती है। अब देखना यह होगा कि क्या वाशिंगटन और तेहरान के बीच शुरू हुई यह सीधी बातचीत किसी ठोस युद्धविराम में तब्दील होती है या फिर 'सुरक्षा की गारंटी' का यह पेंच दुनिया को एक और भीषण महायुद्ध की ओर धकेल देता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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