घाटे का सौदा 'पाक-अमेरिका ' की नई डील ; विपक्षी दल हुआ हावी
हाल ही में हुए पाक-अमेरिका के नए सौदे को दोनों देशों ने फायदेमंद बताया है। पाकिस्तानी अधिकारीयों को विश्वास है की इससे पाकिस्तान में आर्थिक स्थिरता आएगी, लेकिन पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने इसे सौदे को पाक सरकार की लापरवाही कहा है। उनके अनुसार ये समझौता संसद से गुप्त रखा गया है।

पाकिस्तानी पीएम शाहबाज़ शरीफ
भारत से मतभेद बढ़ने के बाद पाकिस्तान अपनी हर नाकाम कोशिशें कर रहा है अमेरिका के नज़र में खुदको सही बताने का। इसलिए पाकिस्तान का अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाने का प्रयास अभी भी जारी है। कुछ समय पहले पाक के पीएम शाहबाज़ शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर अमेरिका के दौरे पर गए थे। वहां उन्होंने अमेरिका को बलूचिस्तान में पाए गए रेयर अर्थ मिनरल (Rare Earth Minerals) के बारे में बताया। इसके सैंपल्स पाकिस्तान द्वारा रवाना कर दिए गए हैं। और दोनों देश इस रेयर अर्थ मिनरल को बहार निकलने और उसके निर्यात पर हुए समझौते को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
इस समझौते की पाकिस्तानी अधिकारीयों ने सराहना करते हुए कहा की, यह दोनों देशो के बीच राजनीतिक और आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाएगा। पर पाकिस्तान की विपक्षी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ का इस समझौते पर कुछ और ही कहना है। उनके मुताबिक इस समझौते की जानकारी संसद को नहीं है। विपक्षी दल ने सरकार पर आरोप लगाया की इस समझौते को गुप्त तरीके से किया गया है और इसकी मंज़ूरी संसद ने नहीं दी है।
यह शिपमेंट अमेरिकी कंपनी यूएस स्ट्रैटेजिक मेटल्स (USSM) के साथ हाल ही में हुए एक समझौते के तहत भेजी गई है, ऐसा डॉन अखबार में आई रिपोर्ट में बताया गया है। उन्होंने बताया की इस समझौते और सौदे की कीमत लगभग 500 मिलियन डॉलर (करीबन 4,000 करोड़ रुपये) हैं।
बलूचिस्तान में पाए गए इस दुर्लभ खनिजों में सोना और टंग्स्टन के शामिल होने की संभावना है। इनकी सहायता से पाकिस्तान रक्षा तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में प्रयोग होने वाले जरूरी खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हो सकता है। पाकिस्तान के लिए यह सौदा 6 ट्रिलियन डॉलर के अनुमानित खनिज भंडार का फायदा उठाने का अवसर है। पाकिस्तानी अधिकारीयों को यह उम्मीद है की इस सौदे का समझौता निवेश उत्पन्न करेगा, रोजगार बढ़ेंगे और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा भी मिलेगा। दूसरी ओर अमेरिका के लिए ये बहुत बड़ा फ़ायदा साबित हो सकता है।
USSM ने इस समझौते को दोनों देशों के लिए एक महत्वूर्ण कदम बताया। कंपनी ने बताया कि यह समझौता खनिज उद्योग में पूरे कामकाज के ढांचे में सहयोग का रास्ता तैयार करता है। इससे जरूरी खनिजों के बाजार में कुछ देशों या कंपनियों पर निर्भरता कम हो सकती है। फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (FWO) की मदद से तैयार इस पहली खेप में तांबे का अंश (कॉपर कॉन्संट्रेट), एंटीमनी और रेयर अर्थ तत्व जैसे नियोडिमियम और प्रसीओडिमियम शामिल हैं। FWO पाकिस्तान सेना का इंजीनियरिंग विभाग है। कई सूत्रों का मानना यह है की अमेरिका रेयर अर्थ मैटेरियल के लिए अब चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहता, इसलिए दुनिया भर में ऐसे खनिज ढूंढ रहा है।
पाकिस्तान के विपक्ष को इस सौदे पर बिलकुल भी भरोसा नहीं है। PTI के सूचना सचिव शेख वकास अकराम का मानना है की सरकार ने लापरवाही, एकतरफा और गुप्त समझौता किया है जिसकी जानकारी संसद के सामने रखना ज़रूरी है। उनके मुताबिक ये समझौता देश में राजनीतिक अस्थिरता को पैदा कर सकता है और इसका संक्षेप विवरण जनता को पता होना चाहिए।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
