लाहौर में LeT के नेता पर दिनदहाड़े चली गोली ; जानें कौन था आतंकी नेटवर्क का आका अमीर हमजा
लाहौर में लश्कर-ए-तैयबा के सह-संस्थापक अमीर हमजा पर अज्ञात हमलावरों ने गोलीबारी की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना आतंकी संगठनों के अंदरूनी हालात और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े करती है।

लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख नेता और विचारक अमीर हमजा
पाकिस्तान के लाहौर शहर में उस समय सनसनी फैल गई जब लश्कर-ए-तैयबा के सह-संस्थापक और प्रमुख विचारक अमीर हमजा पर अज्ञात हमलावरों ने दिनदहाड़े गोलीबारी कर दी। यह हमला एक समाचार चैनल के कार्यालय के बाहर हुआ, जहां अचानक आए हमलावरों ने फायरिंग की और मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल हमजा को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
10 मई 1959 को जन्मे अमीर हमजा लंबे समय से पाकिस्तान स्थित इस इस्लामिस्ट सलाफी जिहादी संगठन के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। उन्हें संगठन का दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता रहा है, जो हाफिज सईद के बाद सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा उन्हें पहले ही आतंकवादी घोषित किया जा चुका है। अपने तीखे भाषणों और लेखन के लिए पहचाने जाने वाले हमजा को लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष वैचारिक स्तंभ भी माना जाता है।
संगठन के केंद्रीय समिति के सदस्य माने जाने वाले हमजा ने न केवल अन्य नेताओं की रिहाई के लिए बातचीत में भूमिका निभाई, बल्कि चंदा जुटाने के अभियानों का नेतृत्व भी किया। वे संगठन के आधिकारिक प्रकाशन ‘मजल्लाह अल-दावा’ के संस्थापक संपादक भी रहे हैं। वर्ष 2002 में उन्होंने ‘काफिला दावत और शहादत’ नामक पुस्तक भी प्रकाशित की थी, जिसमें उनके वैचारिक दृष्टिकोण को विस्तार से प्रस्तुत किया गया।
2018 में पाकिस्तान सरकार द्वारा जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद, हमजा ने ‘जैश-ए-मन्कफा’ नाम से एक नया फंड जुटाने वाला मंच तैयार किया। बताया जाता है कि इस नाम के तहत वे पाकिस्तान में खुलेआम धन जुटाने की गतिविधियों में संलग्न रहे हैं।
हालिया हमला इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले एक वर्ष में यह उन पर दूसरा जानलेवा हमला बताया जा रहा है। हालांकि, अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हुई हैं। इस घटना ने पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े आंतरिक समीकरणों और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लश्कर-ए-तैयबा का नाम भारत में कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा रहा है, जिनमें 2008 का मुंबई हमला प्रमुख है, जिसमें 170 से अधिक लोगों की जान गई थी। इसके अलावा 2001 का भारतीय संसद हमला, 2005 के दिल्ली धमाके, 2007 का हैदराबाद हमला और जम्मू-कश्मीर में तीर्थयात्रियों पर हमले जैसे कई घटनाक्रम इस संगठन से जुड़े रहे हैं। ऐसे में अमीर हमजा पर हुआ यह हमला न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे आतंकी नेटवर्क के भीतर चल रही हलचलों की ओर भी इशारा मिलता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
