खामेनेई का 'आर-पार' का एलान: ईरान में 111 शहरों में भड़की विद्रोह की आग; अमेरिका को दी सीधी चुनौती!
ईरान में जारी अशांति के बीच सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। 9 जनवरी 2026 को दिए अपने भाषण में उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को 'अपने देश की चिंता करने' की सलाह दी और प्रदर्शनों को अमेरिका-इजरायल की साजिश बताया। जानिए कैसे खामेनेई ने एकजुट राष्ट्र का आह्वान कर विदेशी एजेंटों के खिलाफ आर-पार की जंग का एलान किया है।

Ayatollah Khamenei speech Iran protests : ईरान में जारी अभूतपूर्व अशांति और व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच आज देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्र के नाम अपना बहुप्रतीक्षित संबोधन जारी किया। तेहरान की गलियों से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक सरकारी टीवी चैनल के माध्यम से प्रसारित इस भाषण में खामेनेई का स्वर अत्यंत कड़ा और आक्रामक रहा। वर्तमान संकट की शुरुआत के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक बयान है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निशाने पर लेते हुए वैश्विक राजनीति में नए सिरे से तनाव पैदा कर दिया है। खामेनेई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करने वाली किसी भी विदेशी ताकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सर्वोच्च नेता ने अपने संबोधन में देश के भीतर हो रही हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान को एक गहरी विदेशी साजिश का हिस्सा करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ "दंगाई" सड़कों पर उतरकर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा रहे हैं और उनका एकमात्र उद्देश्य वाशिंगटन को खुश करना है। अमेरिका को चेतावनी देते हुए खामेनेई ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाय अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान का इतिहास गवाह है कि यह राष्ट्र किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के सामने नहीं झुका है और भविष्य में भी अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अडिग रहेगा।
संबोधन के दौरान खामेनेई ने विशेष रूप से ईरान के युवाओं से एकजुट रहने की मार्मिक अपील की। उन्होंने प्रदर्शनों को अमेरिका और इजरायल द्वारा वित्तपोषित "एजेंटों की करतूत" बताते हुए कहा कि राष्ट्र की एकता ही वह एकमात्र कवच है जो किसी भी दुश्मन को धूल चटा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि अपने लोगों और अपनी भूमि की रक्षा करना कोई आक्रामकता नहीं, बल्कि साम्राज्यवाद के क्रूर चेहरे के सामने साहस का प्रदर्शन है। खामेनेई का यह बयान इस मायने में महत्वपूर्ण है कि यह न केवल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रुख का संकेत देता है, बल्कि सुरक्षा बलों को भी 'विदेशी ऑपरेटिव्स' के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का नैतिक आधार प्रदान करता है।
ईरान की न्यायपालिका और सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि हिंसा में शामिल तत्वों के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाई जाएगी। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इस भाषण को तेहरान और वाशिंगटन के बीच बढ़ते शीत युद्ध के एक नए चरण के रूप में देख रहे हैं। खामेनेई का यह संबोधन ईरान की राजनीतिक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि यह देश के युवाओं को देशभक्ति की भावना से जोड़ते हुए विदेशी दखल के खिलाफ एक मजबूत रक्षात्मक घेरा तैयार करने की कोशिश है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि खामेनेई की यह अपील सड़कों पर उतरे जनआक्रोश को शांत करने में सफल होती है या संघर्ष और अधिक तीव्र रूप अख्तियार करेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
