अस्ताना। सशस्त्र संघर्ष शुरू होने से पहले ही नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की तैयारी जरूरी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए कजाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (आईएचएल) के प्रभावी अनुपालन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। देश का कहना है कि मानवीय कानून के प्रति सम्मान केवल युद्ध के दौरान ही नहीं, बल्कि संघर्ष की आशंका से पहले भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

कजाकिस्तान का यह रुख जिनेवा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून पर वैश्विक संवाद के दौरान सामने आया। स्विट्जरलैंड के संघीय विदेश विभाग और अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (आईसीआरसी) की ओर से आयोजित इस संवाद में कजाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल ने अपना पक्ष रखा। इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय की प्रेस सेवा ने दी।

कजाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में कजाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि एरझान काजिकान ने किया। इस वैश्विक संवाद में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के साथ अंतरराष्ट्रीय एवं मानवीय संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों ने भाग लिया।

यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के प्रति राजनीतिक प्रतिबद्धता को मजबूत करने की वैश्विक पहल के तहत किया गया। अपने वक्तव्य में कजाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सम्मान और अनुपालन को केवल सशस्त्र संघर्ष के दौरान बढ़ावा देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी व्यवस्थाएं तैयार करना आवश्यक है।

प्रतिनिधिमंडल ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के क्रियान्वयन से जुड़े राष्ट्रीय तंत्र को मजबूत करने, सैन्य प्रशिक्षण और निर्देशों में इसके नियमों को शामिल करने तथा सरकारी अधिकारियों एवं सैन्य कर्मियों के बीच कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता रेखांकित की।

संवाद के दौरान वैश्विक पहल के तहत निर्धारित सात विषयगत कार्यधाराओं में विकसित व्यावहारिक सिफारिशों पर भी चर्चा हुई। इनका उद्देश्य मौजूदा मानवीय कानून के अनुपालन को अधिक प्रभावी बनाना है। प्रतिभागियों ने नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के साथ-साथ सशस्त्र संघर्षों में नई तकनीकों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों पर भी विचार-विमर्श किया।

इस पहल का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 7 दिसंबर को जॉर्डन की राजधानी अम्मान में आयोजित होने वाला ‘ह्यूमैनिटी इन वॉर’ उच्चस्तरीय सम्मेलन होगा। इस सम्मेलन में वैश्विक पहल के तहत बनी सहमतियों को उच्चस्तरीय राजनीतिक समर्थन दिलाने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून को बनाए रखने के लिए देशों को ठोस कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करने की अपेक्षा है। इस तरह जिनेवा संवाद के बाद अब अम्मान सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुपालन को लेकर राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक कार्रवाई में बदलने पर जोर रहेगा।

Pratahkal Bureau

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