जापान ने नियमों में लापरवाही के चलते भारतीय आमों के आयात पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध; अल्फांसो, केसर और लंगड़ा का एक्सपोर्ट रुका, कारोबारियों को भारी नुकसान।

Japan Mango Ban 2026 : भारतीय आमों के दीवानों और वैश्विक कारोबारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से एक बेहद निराशाजनक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अपनी बेमिसाल मिठास और शाही स्वाद के लिए पूरी दुनिया में मशहूर भारत के प्रीमियम आमों पर जापान सरकार ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। करीब दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद जापान ने अचानक भारतीय आमों के आयात पर यह कड़ा रुख अपनाया है, जिसने भारत के आम उत्पादकों और निर्यातकों की रातों की नींद उड़ा दी है। अप्रैल से जून के बीच चलने वाला यह मुख्य एक्सपोर्ट सीजन, जो आम तौर पर करोड़ों रुपये के टर्नओवर से गुलजार रहता था, अब इस अचानक लगे प्रतिबंध के कारण पूरी तरह सूना और बेपटरी होने की कगार पर पहुंच गया है।

इस कड़े और अप्रत्याशित फैसले का सीधा और सबसे बड़ा प्रहार भारत की उन चुनिंदा और सबसे लोकप्रिय आम की वैरायटीज़ पर पड़ा है, जो वैश्विक मंच पर देश की पहचान हैं। इस प्रतिबंध के दायरे में मुख्य रूप से शाही आम हापुस यानी अल्फांसो, सौराष्ट्र की शान केसर, उत्तर भारत का प्रसिद्ध लंगड़ा और दक्षिण का प्रमुख बंगनापल्ली आम शामिल हैं। जापानी बाजार में इन प्रीमियम आमों की न केवल भारी मांग रहती थी, बल्कि वहां भारतीय निर्यातकों को इनके लिए बेहद शानदार और प्रीमियम दाम भी मिलते थे। इस रोक के बाद इन सभी टॉप-क्वालिटी वैरायटी का एक्सपोर्ट पूरी तरह से ठप हो गया है, जिससे इस पीक सीजन में भारतीय आम कारोबार को एक बहुत बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इस बड़े प्रतिबंध के पीछे की इनसाइड स्टोरी को खंगालें तो पता चलता है कि यह पूरी कार्रवाई गुणवत्ता मानकों की अनदेखी के कारण हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2026 में जापान के प्लांट प्रोटेक्शन अधिकारियों के एक उच्च स्तरीय दल ने भारत के आम प्रोसेसिंग सेंटर्स का औचक दौरा किया था। इस गहन जांच के दौरान जापानी अधिकारियों ने पाया कि भारतीय सेंटर्स पर कीड़ों को नष्ट करने वाली फ्यूमिगेशन (धुआं देने की प्रक्रिया) और डिसइन्फेक्शन (कीटाणुशोधन) के कड़े नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा था। जापान में फ्रूट फ्लाई यानी फल मक्खी जैसे किसी भी बाहरी कीट को लेकर 'जीरो टोलरेंस पॉलिसी' लागू है, क्योंकि ये कीड़े वहां की स्थानीय फसलों और कृषि तंत्र को पूरी तरह से तबाह करने की क्षमता रखते हैं।

बिजनेस टुडे की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, जापानी क्वारंटाइन ऑफिसर्स ने उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) फैसिलिटी का दौरा कर वहां की बारीकियों को परखा था। इस जांच में फ्यूमिगेशन और डिसइंफेक्शन की प्रक्रियाओं में बेहद गंभीर खामियां उजागर हुईं। गौरतलब है कि वेपर हीट ट्रीटमेंट एक ऐसी बिना केमिकल वाली बेहद संवेदनशील वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत गर्म हवा और नमी के जरिए आम के अंदर मौजूद फल मक्खी के अदृश्य लार्वा को पूरी तरह खत्म किया जाता है। इन अनिवार्य नियमों में बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद, जापान की योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 25 मार्च 2026 के बाद जारी सर्टिफिकेट वाले सभी भारतीय शिपमेंट्स को स्वीकार करने से साफ मना कर दिया।

हालांकि जापान मात्रा के लिहाज से भारतीय आमों का सबसे बड़ा खरीदार देश नहीं है, लेकिन इसे भारतीय आमों के लिए सबसे मूल्यवान और प्रीमियम मार्केट्स में से एक माना जाता है, जहां ऊंचे दामों के कारण मुनाफा काफी ज्यादा होता था। यह झटका ऐसे समय पर आया है जब भारतीय आम उद्योग पहले ही प्रकृति और वैश्विक हालातों की दोहरी मार झेल रहा है। इस साल अल नीनो के प्रभाव और भीषण हीटवेव के चलते महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में अल्फांसो की फसल को पहले ही करीब 85 से 90 फीसदी तक का भारी नुकसान हो चुका है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट की वजह से एयर फ्रेट यानी हवाई मालभाड़े की दरें भी 250-350 रुपये प्रति किलो से आसमान छूती हुई 580-590 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी हैं।

फसल की बेहद कम पैदावार, रिकॉर्ड तोड़ हवाई भाड़े और अब जापान के इस अचानक लगे प्रतिबंध की तिकड़ी ने भारतीय एक्सपोर्टर्स के सामने एक अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है। जो निर्यातक हर साल जापान में बेस्ट क्वालिटी के अल्फांसो और केसर जैसे शाही आम भेजकर देश के लिए विदेशी मुद्रा कमाते थे, वे अब पूरी तरह घाटे के भंवर में फंसते नजर आ रहे हैं। तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर हुई यह चूक न केवल मौजूदा सीजन के व्यापार को निगल गई है, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की साख और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणालियों पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है, जिसे सुधारने में अब भारत को लंबी कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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