महारानी गायत्री देवी की विंटेज साड़ी और जयपुर का शाही अंदाज़ ; देखें गौरवी और पद्मनाभ का मेट गाला लुक
मेट गाला 2026 में जयपुर के शाही भाई-बहन गौरवी कुमारी और सवाई पद्मनाभ सिंह ने प्रबल गुरंग के डिजाइन में पारंपरिक राजस्थानी विरासत और आधुनिक फैशन का अद्भुत संगम पेश किया, जिसने वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति को नई पहचान दी।

मेट गाला 2026 के दौरान राजकुमारी गौरवी कुमारी (बाएं) और महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह (दाएं)
न्यूयॉर्क में आयोजित मेट गाला 2026 के भव्य मंच पर इस बार जयपुर के शाही परिवार की नई पीढ़ी ने ऐसा प्रभाव छोड़ा, जिसने फैशन जगत को भारतीय विरासत की गहराई से रूबरू करा दिया। जयपुर की राजकुमारी गौरवी कुमारी और महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह ने पहली बार इस प्रतिष्ठित रेड कार्पेट पर कदम रखते हुए परंपरा और आधुनिकता का ऐसा मेल प्रस्तुत किया, जिसने वैश्विक दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
इस प्रतिष्ठित आयोजन में दोनों भाई-बहन प्रसिद्ध डिजाइनर प्रबल गुरंग द्वारा तैयार किए गए परिधानों में नजर आए, जिनमें राजस्थान की समृद्ध कारीगरी और सांस्कृतिक विरासत की स्पष्ट झलक दिखाई दी। उनकी उपस्थिति ने न केवल फैशन प्रेमियों को आकर्षित किया, बल्कि इसे रात के सबसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पलों में से एक माना गया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हुआ।
गौरवी कुमारी, जो जयपुर के पूर्व शाही परिवार से ताल्लुक रखती हैं और दिया कुमारी की पुत्री हैं, परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन का प्रतीक मानी जाती हैं। वे शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े कई सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। वहीं, सवाई पद्मनाभ सिंह, जिन्हें ‘पाचो’ के नाम से भी जाना जाता है, जयपुर के नाममात्र के महाराजा हैं। वे 2011 में मात्र 12 वर्ष की आयु में इस पद पर आसीन हुए और तब से शाही जिम्मेदारियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोलो खिलाड़ी के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं।
गौरवी कुमारी का परिधान इस शाम का एक प्रमुख आकर्षण रहा। उन्होंने अपनी दादी महारानी गायत्री देवी की विरासत से जुड़ी एक विंटेज शिफॉन साड़ी को आधुनिक गाउन के रूप में धारण किया, जिसे प्रबल गुरंग ने विशेष रूप से डिजाइन किया था। हल्के गुलाबी रंग और बारीक सीक्विन वर्क से सजी इस पोशाक में विंटेज आकर्षण और आधुनिकता का अद्भुत संतुलन देखने को मिला। उन्होंने अपने इस खास लम्हे को साझा करते हुए कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद व्यक्तिगत और भावनात्मक रहा। उनके आभूषणों में जयपुर के ‘द जेम पैलेस’ से लिए गए मोती, रूबी और बिना कटे हीरे शामिल थे, जो महारानी गायत्री देवी को श्रद्धांजलि देने का सूक्ष्म संकेत भी थे।
दूसरी ओर, सवाई पद्मनाभ सिंह ने गहरे नीले रंग के मखमली ‘फुलगर’ कोट में शाही गरिमा का प्रदर्शन किया। इस परिधान को तैयार करने में लगभग 600 घंटे का समय लगा, जिसमें आरी और ज़रदोज़ी कढ़ाई के साथ रेशम और डबका का बारीक काम किया गया था। उनके बंधगला सूट में ‘सिटी पैलेस’ के श्री निवास से प्रेरित सूर्य आकृति का विशेष डिज़ाइन शामिल था, जो उनके सूर्यवंशी वंश की पहचान को दर्शाता है। इसके साथ उन्होंने जड़ाऊ और पोल्की हार पहने, जो जयपुर के जौहरी बाजार की पारंपरिक कारीगरी का प्रतीक हैं।
मेट गाला 2026 का थीम “फैशन इज़ आर्ट” इस प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत होता नजर आया। यह केवल फैशन प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारतीय इतिहास, परंपरा और पहचान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बन गया। जयपुर के इन शाही भाई-बहनों की यह उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि फैशन केवल पहनावे तक सीमित नहीं, बल्कि यह संस्कृति और विरासत को संजोने का भी एक प्रभावशाली माध्यम है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
