हॉर्मुज की नाकेबंदी पर ईरान का सख्त रुख ; कहा 'पहली मिसाइल से डुबो देंगे अमेरिकी जहाज'
ईरान-अमेरिका के बीच महायुद्ध का खतरा! ट्रंप की नौसैनिक नाकेबंदी से भड़का ईरान, पहली मिसाइल से अमेरिकी जहाज डुबोने की दी धमकी। इस्लामाबाद शांति वार्ता हुई विफल।

Mojtaba Khamenei and Donald Trump
Iran US Conflict 2026 : खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे हो गए हैं। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता (Peace Talks) के बेनतीजा खत्म होते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे कठोर कदम उठाते हुए उसके बंदरगाहों की 'नौसैनिक नाकेबंदी' (Naval Blockade) कर दी है। इस फैसले ने ईरान को इस कदर आक्रोशित कर दिया है कि उसने अब सीधे शब्दों में अमेरिकी नौसेना के जहाजों को समुद्र में समाधि देने की चेतावनी जारी कर दी है। दुनिया की सबसे व्यस्त समुद्री पट्टी 'होर्मुज स्ट्रेट' अब एक ऐसे अखाड़े में तब्दील होती दिख रही है, जहाँ एक छोटी सी चिंगारी वैश्विक तबाही का कारण बन सकती है।
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक घोषणा करते हुए ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले और वहां से निकलने वाले सभी जहाजों को रोकने का आदेश दिया। ट्रंप प्रशासन के इस अप्रत्याशित फैसले का उद्देश्य ईरान की आर्थिक कमर तोड़ना और उसे बातचीत की मेज पर अपनी शर्तों पर लाना माना जा रहा है। हालांकि, ईरान ने इस 'घेराबंदी' का जवाब बारूद की भाषा में दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के पूर्व कमांडर-इन-चीफ मोहसिन रेजाई ने सरकारी टेलीविजन पर दहाड़ते हुए कहा कि मिस्टर ट्रंप होर्मुज स्ट्रेट के 'पुलिस अधिकारी' बनने का ख्वाब देख रहे हैं, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं है कि उनके ये विशाल जहाज हमारी मिसाइलों के लिए सिर्फ आसान लक्ष्य हैं। रेजाई ने दो टूक शब्दों में कहा, "हमारी पहली मिसाइल ही अमेरिकी जहाजों को डुबोने के लिए काफी होगी।"
इस सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक गलियारों में भी कड़वाहट साफ देखी जा रही है। इस्लामाबाद में हुई वार्ता के विफल होने के बाद संघर्ष विराम (Ceasefire) को बढ़ाने की उम्मीदें धूमिल होती दिख रही हैं। मोहसिन रेजाई ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत रूप से युद्धविराम को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। ईरान का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वह अब दबाव की राजनीति के आगे झुकने को तैयार नहीं है। उधर, व्हाइट हाउस ने उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें दावा किया जा रहा था कि अमेरिका ने औपचारिक रूप से सीजफायर बढ़ाने का अनुरोध किया है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी पूरी तरह से प्रभावी हो चुकी है। यह प्रतिबंध केवल ईरान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी से होकर ईरान जाने वाले किसी भी देश के जहाज पर लागू होगा। लीविट ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी नौसेना ओमान की खाड़ी में मुस्तैद है और सेंटकॉम के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि गैर-ईरानी बंदरगाहों तक जाने वाले जहाजों के लिए 'नेविगेशन की स्वतंत्रता' का समर्थन जारी रहेगा, लेकिन ईरान के लिए समुद्री रास्ते पूरी तरह बंद रहेंगे।
वर्तमान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान ने अपनी धमकी पर अमल करते हुए होर्मुज स्ट्रेट में कोई भी सैन्य कार्रवाई की, तो यह केवल दो देशों का टकराव नहीं बल्कि एक पूर्ण वैश्विक युद्ध में बदल सकता है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है, और यहाँ किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था को घुटनों पर ला सकता है। फिलहाल, अमेरिकी बेड़े समुद्र में अलर्ट पर हैं और ईरानी मिसाइलें अपने लॉन्च पैड पर तैनात हैं—पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप की 'नाकेबंदी' और ईरान की 'मिसाइल धमकी' में से किसका पलड़ा भारी रहता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
