Strait of Hormuz Crisis : मध्य पूर्व के रणक्षेत्र में तनाव अब उस निर्णायक मोड़ पर आ गया है जहाँ से वापसी की राह धुंधली होती जा रही है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के तमाम दावों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सामरिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को फिलहाल नहीं खोला जाएगा। ईरान की ओर से आया यह सख्त संदेश न केवल वॉशिंगटन के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है, बल्कि इसने वैश्विक तेल बाजार और विश्व अर्थव्यवस्था की धड़कनें भी बढ़ा दी हैं।

ईरान का दोटूक फैसला और आंतरिक मतभेद :

ईरान की संसद के डिप्टी स्पीकर ने एक बेहद कड़ा और सनसनीखेज बयान जारी करते हुए कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया जिसमें अमेरिका के साथ पर्दे के पीछे बातचीत की चर्चा हो रही थी। डिप्टी स्पीकर ने स्पष्ट किया कि न तो कोई बातचीत हुई है और न ही भविष्य में इसकी कोई संभावना है। रोचक बात यह है कि उन्होंने संसद के ही स्पीकर द्वारा दिए गए बातचीत के संकेतों को 'निराधार' और 'विवाद पैदा करने वाला' करार देकर ईरान के भीतर चल रहे वैचारिक द्वंद्व को भी उजागर कर दिया है।

सर्वोच्च नेता का अंतिम निर्णय और नई 'टोल योजना' :

ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में युद्ध और शांति जैसे गंभीर विषयों पर अंतिम मुहर वहां के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) की ही होती है। डिप्टी स्पीकर ने साफ किया कि फिलहाल सर्वोच्च नेता की ओर से बातचीत के लिए कोई हरी झंडी नहीं मिली है। इस बीच, ईरानी संसद ने होर्मुज जलमार्ग के प्रबंधन को लेकर एक अभूतपूर्व और आक्रामक योजना को मंजूरी दी है। इस नई योजना के तहत इस मार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर भारी 'टोल' (शुल्क) लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार के नियमों को एक नई चुनौती दे सकता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: अमेरिका और ट्रंप का रुख

दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट पर अपनी अलग राय रखी है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका दो से तीन हफ्तों के भीतर इस संघर्ष से बाहर निकल सकता है। उन्होंने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान के साथ किसी औपचारिक समझौते की आवश्यकता नहीं है; अमेरिका के हटने के बाद होर्मुज की स्थिति से उसका कोई लेना-देना नहीं होगा।

हालांकि, अमेरिकी प्रशासन के अन्य कद्दावर नेता अधिक सख्त नजर आ रहे हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दी है कि सैन्य ऑपरेशन खत्म होने के बाद जलमार्ग को हर हाल में खुला रखा जाएगा, चाहे इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सहारा लेना पड़े या गठबंधन सेना की ताकत का। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ने इस मार्ग को खुला रखने के लिए अपनी सैन्य तैयारियां पूरी कर ली हैं।


वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा :

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी वॉशिंगटन के साथ किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संदेश के आदान-प्रदान को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इस कूटनीतिक गतिरोध का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर दिख रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही ठप होने के कगार पर पहुँचने से कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचा, तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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