ईरान-अमेरिका युद्ध में ऐतिहासिक मोड़ ; ट्रंप के सीजफायर पर मुज्तबा खामेनेई ने दी पहली प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर पर ईरान के मुज्तबा खामेनेई का बड़ा बयान। सेना को दी गोलीबारी रोकने की सलाह लेकिन कहा- 'ये युद्ध का अंत नहीं, हाथ अभी भी ट्रिगर पर हैं।'

तस्वीर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (बाएं) और ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई (दाएं)।
US Iran War Ceasefire 2026 : पश्चिम एशिया के धधकते रणक्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया की सांसें थाम दी हैं। महीनों से जारी विनाशकारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित दो सप्ताह के द्विपक्षीय युद्धविराम (सीजफायर) पर ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने अपनी पहली और निर्णायक प्रतिक्रिया दी है। तेहरान से जारी एक आधिकारिक संदेश में खामेनेई ने ईरानी सेना को तत्काल प्रभाव से गोलीबारी रोकने का आदेश तो दिया है, लेकिन साथ ही एक ऐसी चेतावनी भी दी है जिसने शांति की कोशिशों के बीच तनाव की लकीरें गहरी कर दी हैं। खामेनेई ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह आदेश केवल सैन्य परिचालन को थामने के लिए है, इसे किसी भी सूरत में युद्ध की समाप्ति न समझा जाए।
सरकारी टेलीविजन चैनल 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग' (IRIB) पर प्रसारित किए गए इस ऐतिहासिक संबोधन में मुज्तबा खामेनेई ने सैन्य नेतृत्व को संबोधित करते हुए कहा कि सभी सैन्य शाखाएं सर्वोच्च कमांडर के निर्देशों का अक्षरशः पालन करें और अपनी बंदूकें शांत कर लें। हालांकि, उन्होंने कड़े लहजे में जोड़ा कि ईरान की रक्षात्मक मुद्रा अभी भी उतनी ही आक्रामक है। इसी सुर में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि उनके हाथ अभी भी 'ट्रिगर' पर हैं। परिषद के अनुसार, यदि इस अल्पकालिक शांति के दौरान दुश्मन (अमेरिका या उसके सहयोगी) द्वारा जरा सी भी सामरिक चूक या उकसावे वाली कार्रवाई की गई, तो उसका जवाब पूरी सैन्य ताकत के साथ 'मुंहतोड़' तरीके से दिया जाएगा।
इस नाटकीय घटनाक्रम की पटकथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुई, जिसमें उन्होंने ईरान पर होने वाली बमबारी को 14 दिनों के लिए स्थगित करने का एलान किया था। ट्रंप ने खुलासा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ हुई गहन कूटनीतिक चर्चा के बाद उन्होंने अपनी 'विनाशकारी सैन्य शक्ति' को रोकने का फैसला लिया है। हालांकि, इस सीजफायर के बदले अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से खुला और सुरक्षित रखने की अनिवार्य शर्त रखी है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की ओर से उन्हें एक 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जो भविष्य की लंबी बातचीत के लिए एक ठोस और व्यवहार्य आधार साबित हो सकता है।
ईरान द्वारा रखे गए इन 10 प्रस्तावों ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जिनमें भविष्य में किसी भी प्रकार की आक्रामकता न करने, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रखने और अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी प्राथमिक व द्वितीयक प्रतिबंधों को हटाने जैसी कड़ी शर्तें शामिल हैं। इसके अलावा, तेहरान ने आईएईए (IAEA) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी पुराने प्रस्तावों को रद्द करने, क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू विमानों की वापसी और युद्ध से हुए नुकसान के मुआवजे की भी मांग की है। सबसे महत्वपूर्ण शर्त लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की पूर्ण समाप्ति से जुड़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह 14 दिनों का युद्धविराम एक दोधारी तलवार की तरह है। एक ओर जहां यह हजारों नागरिकों के लिए जीवनदान लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर मुज्तबा खामेनेई का कड़ा रुख यह दर्शाता है कि अविश्वास की खाई अभी भी बहुत गहरी है। यह समझौता केवल एक 'रणनीतिक ठहराव' है या स्थायी शांति की ओर पहला कदम, इसका फैसला आने वाले दो हफ्तों की कूटनीतिक उठापटक और होर्मुज की लहरों पर होने वाली सैन्य हलचल से तय होगा। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस 'ट्रिगर पर हाथ' वाली शांति पर टिकी हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
