मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि पश्चिमी देशों का वर्चस्व खत्म हो रहा है और ईरान के प्रतिरोध ने 'ग्लोबल साउथ' के उदय की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है।

Iran US Tension : दुनिया इस समय एक ऐतिहासिक और बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है, जहाँ सदियों पुराना पश्चिमी देशों का आर्थिक और सैन्य दबदबा अब तेजी से कमजोर होता दिखाई दे रहा है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने रविवार को एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि वैश्विक राजनीति का रुख अब पूरी तरह मुड़ चुका है और आने वाला भविष्य अब 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) का है। गालिबाफ का यह बयान अंतरराष्ट्रीय गलियारों में उस समय आया है, जब अमेरिका और चीन के राष्ट्रपतियों के बीच दुनिया को प्रभावित करने वाली एक बेहद अहम मुलाकात संपन्न हुई है। इस बयान के बाद पश्चिम से लेकर पूर्व तक के कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

ईरान का प्रतिरोध और चीन की भविष्यवाणी: एक नई धुरी का उदय

ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए दुनिया के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस प्रसिद्ध और ऐतिहासिक बयान का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसमें जिनपिंग ने कहा था कि “सदी में पहली बार दुनिया में एक बहुत बड़ा परिवर्तन बेहद तेजी के साथ घटित हो रहा है।”

गालिबाफ ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बनाए गए भीषण सैन्य और आर्थिक दबाव के खिलाफ ईरानी जनता ने जो ७० दिनों तक अटूट 'प्रतिरोध लड़ाई' (Resistance Fight) लड़ी है, उसने इस वैश्विक बदलाव की रफ्तार को कई गुना तेज कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरानी जनता के इस कड़े प्रतिरोध ने पुरानी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है और अब उन देशों का समय आ गया है जिन्हें आज तक केवल पश्चिमी ताकतों के प्रभाव क्षेत्र के रूप में देखा जाता था।

ट्रंप-शी मुलाकात के तुरंत बाद आया यह बड़ा बयान :

ईरान की ओर से यह तीखी प्रतिक्रिया ठीक उस समय आई है, जब चीन की धरती पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक खत्म हुई है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में दोनों महाशक्तियों के बीच व्यापार समझौतों, नए टैरिफ नियमों और ताइवान जैसे बेहद संवेदनशील और विवादित मुद्दों पर आमने-सामने चर्चा हुई।

इसी बैठक के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक परिस्थितियों की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा था कि इस समय पूरी दुनिया की नजरें चीन और अमेरिका के रिश्तों पर टिकी हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय हालात अभूतपूर्व गति से बदल रहे हैं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या दोनों देश "थ्यूसीडिड्स ट्रैप" (Thucydides Trap) से बाहर निकलकर बड़े देशों के आपसी संबंधों का एक नया और शांतिपूर्ण मॉडल तैयार कर सकते हैं?

समझिए क्या है 'थ्यूसीडिड्स ट्रैप' जिसने बढ़ाई दुनिया की धड़कनें :

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति में इस समय 'थ्यूसीडिड्स ट्रैप' शब्द सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है:

उत्पत्ति: इस शब्द का प्रयोग सबसे पहले हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रख्यात राजनीतिक विद्वान ग्राहम टी. एलिसन ने किया था।

परिभाषा: यह एक ऐसी खतरनाक स्थिति को दर्शाता है जब कोई नई और तेजी से उभरती हुई ताकत (जैसे चीन), किसी पहले से स्थापित वैश्विक महाशक्ति (जैसे अमेरिका) के वर्चस्व को खुली चुनौती देने लगती है।

नतीजा: इतिहास गवाह है कि ऐसी स्थिति में दोनों शक्तियों के बीच एक बड़े और विनाशकारी सैन्य टकराव या युद्ध का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है।

भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस शब्द का उपयोग करके परोक्ष रूप से पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे हालिया और भीषण तनाव की ओर ही इशारा किया था। हालांकि, इसके साथ ही शी जिनपिंग ने संतुलित रुख अपनाते हुए यह भी कहा कि अमेरिका और चीन के बीच मतभेदों से कहीं ज्यादा साझा हित हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि दोनों देशों का आपसी सहयोग जहाँ पूरी दुनिया को फायदा पहुंचाएगा, वहीं इनका टकराव दोनों के लिए विनाशकारी साबित होगा।

एकध्रुवीय व्यवस्था का पतन और बहुध्रुवीय युग की शुरुआत :

ईरान के सरकारी मीडिया संस्थान 'प्रेस टीवी' (Press TV) ने इस पूरे घटनाक्रम को पश्चिमी साम्राज्य के पतन और एक नई बहुध्रुवीय (Multipolar) वैश्विक व्यवस्था के मजबूत संकेत के रूप में प्रस्तुत किया है। ईरानी मीडिया की आधिकारिक रिपोर्टों में पुरजोर दावा किया गया है कि ईरान के अडिग हौसले ने अमेरिका के नेतृत्व वाली पुरानी एकध्रुवीय व्यवस्था के खोखलेपन और उसकी कमजोरियों को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान समय में लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के कई विकासशील देश अब पश्चिमी वर्चस्व, उनके आर्थिक प्रतिबंधों, सैन्य हस्तक्षेपों और दबाव की नीतियों का एक मजबूत और संप्रभु विकल्प तलाश रहे हैं।

ईरान का यह आक्रामक और कूटनीतिक रुख साफ संदेश देता है कि अब दुनिया को किसी एक महाशक्ति के इशारों पर नहीं चलाया जा सकता। अमेरिका की तमाम धमकियों और पाबंदियों के बावजूद ईरान और ग्लोबल साउथ के देशों का यह नया गठजोड़ आने वाले दिनों में वाशिंगटन और उसके सहयोगियों की रणनीतिक चिंताओं को और ज्यादा बढ़ाने वाला है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story