अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान ने युद्ध समाप्त करने और अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए सात दिन की योजना पेश की है। इस प्रस्ताव के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक वार्ता शुरू करने का रास्ता तैयार करने की बात कही गई है। हालांकि, इस योजना का भविष्य अमेरिका की शर्तों और प्रस्ताव को स्वीकार करने के फैसले पर निर्भर करता है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान न्यूयॉर्क में पत्रकारों को बताया कि तेहरान ने मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका के सामने यह योजना रखी है। इसके अनुसार, आवश्यक शर्तें पूरी होने पर सातवें दिन के अंत तक होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दिया जाएगा और बातचीत दोबारा शुरू होगी।

ईरान की योजना में सात दिनों के भीतर सभी मोर्चों पर शत्रुता समाप्त करने का प्रस्ताव शामिल है। इसमें लेबनान में जारी संघर्ष को रोकना भी शामिल है। इसके बदले अमेरिका से ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में छूट देने, देश की कम से कम 12 अरब डॉलर की अनुमानित जब्त संपत्तियों को जारी करने और ईरान पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मांग की गई है। योजना के अनुसार, अमेरिका की सहमति मिलते ही ईरान इसे लागू करने के लिए तैयार है।

यह प्रस्ताव जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन की प्रतिबद्धताओं पर आधारित बताया गया है। उस समझौते में संघर्षविराम को 60 दिनों तक बढ़ाने और इस अवधि में अंतिम समझौते की शर्तों पर बातचीत करने की व्यवस्था थी। इसके साथ ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में छूट और होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात को युद्ध से पहले के स्तर पर वापस लाने की उम्मीद जताई गई थी। समझौते में ईरान और ओमान को जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात के प्रबंधन का तरीका तय करने की बात भी शामिल थी।

हालांकि, जून का समझौता जुलाई की शुरुआत में दोनों पक्षों की ओर से कथित उल्लंघनों के बाद टूट गया। उस समझौते में लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रावधान भी था। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पहले ही जून के समझौते पर लौटने से इनकार कर चुका है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान ईरानी अधिकारियों और अमेरिकी पक्ष के बीच कूटनीतिक संपर्क जारी रहे।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान आरोप लगाया था कि ईरान नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव तक समझौता टालना चाहता है। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान उनकी शर्तें स्वीकार नहीं करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने ईरान को बिना बचने की उम्मीद और भविष्य की महानता की संभावना के नरक में धकेलने जैसी धमकी भी दी थी।

अमेरिका में बढ़ती ईंधन कीमतें भी इस पूरे घटनाक्रम का अहम पहलू हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने तथा ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट की खबरों के बीच नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले किसी समझौते की संभावना पर चर्चा हो रही है। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी के पास अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों, सीनेट और प्रतिनिधि सभा, का नियंत्रण है। हालांकि, हालिया सर्वेक्षणों में मध्यावधि चुनाव से पहले डेमोक्रेटिक पार्टी को मामूली बढ़त मिलने के संकेत बताए गए हैं।

अराघची ने कहा कि नवंबर के चुनाव से पहले समझौता हो जाना बेहतर होगा, लेकिन समयसीमा तय करना अमेरिकी प्रशासन पर निर्भर करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान जल्दबाजी में नहीं है। उनके मुताबिक, अमेरिका के योजना स्वीकार करते ही अगले दिन से सात दिनों की समयसीमा शुरू हो सकती है और सात दिन पूरे होने पर होर्मुज जलडमरूमध्य खोल दिया जाएगा।

इस बीच, युद्ध के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा है। देश में खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी वृद्धि, दवाओं की कमी और व्यापारिक गतिविधियों में बाधा जैसी समस्याएं सामने आई हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप के संबोधन के बाद भी कतर के मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने ईरान के प्रस्ताव पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि दोनों देश मध्यस्थों के जरिए सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, ईरानी पक्ष ने किसी भी समझौते का अमेरिका की ओर से पालन किए जाने को लेकर संदेह जताया है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान निदेशक अली वाएज ने ईरान के प्रस्ताव को रणनीतिक रूप से समझदारी भरा कदम बताया। उनके अनुसार, इससे ट्रंप को अलोकप्रिय युद्ध समाप्त करने और मध्यावधि चुनाव से पहले ऊर्जा कीमतों में कमी लाने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, परमाणु मुद्दे पर अपेक्षाकृत कम समय में बातचीत शुरू करने का रास्ता भी खुल सकता है।

इस तरह ईरान की सात दिवसीय योजना में युद्धविराम, प्रतिबंधों में राहत, जब्त संपत्तियों की वापसी और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल हैं। प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय अमेरिका को लेना है। दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास और जून के समझौते के टूटने के अनुभव के कारण इस योजना की सफलता कूटनीतिक बातचीत और दोनों पक्षों की सहमति पर निर्भर करेगी।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story