Iran US Conflict : मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) इस वक्त एक ऐसे मुहाने पर खड़ा है, जहाँ तनाव की एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक तबाही का सबब बन सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी ने न केवल कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि सीजफायर और शांति की तमाम कोशिशों पर भी पानी फेर दिया है। आज जो हालात हैं, उनकी जड़ें इतिहास के पन्नों और दो अमेरिकी राष्ट्रपतियों—बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप—की बिल्कुल विपरीत नीतियों में दबी हुई हैं।

परमाणु समझौते का उदय और पतन :

इस पूरे विवाद की पटकथा साल 2015 में लिखी गई थी, जब तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में ऐतिहासिक 'ईरान न्यूक्लियर डील' पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य ईरान की परमाणु गतिविधियों पर 15 सालों के लिए लगाम लगाना था। उस समय ईरान ने वैश्विक शांति की ओर कदम बढ़ाते हुए अपना लगभग 12.5 टन यूरेनियम रूस भेजने पर सहमति जताई थी। लेकिन, कूटनीति के इस बिसात पर साल 2018 में एक बड़ा मोड़ आया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को 'एकतरफा' और 'कमजोर' करार देते हुए अमेरिका को इससे बाहर कर लिया। ट्रंप के इस फैसले ने न केवल उनके अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों को हैरान किया, बल्कि ईरान को फिर से परमाणु संवर्धन की राह पर धकेल दिया।

खतरे की घंटी: यूरेनियम का बढ़ता भंडार

अमेरिका के पीछे हटते ही ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों को तेज कर दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान आज परमाणु बम बनाने की दहलीज के बेहद करीब पहुंच चुका है। अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों और सुरक्षा विशेषज्ञों के आंकड़े डराने वाले हैं:

यूरेनियम का स्टॉक: ईरान के पास फिलहाल लगभग 11 टन यूरेनियम का भंडार है।

विनाशकारी क्षमता: यदि इस भंडार को और अधिक रिफाइन (संवर्धित) किया जाए, तो इससे लगभग 100 परमाणु बम तैयार किए जा सकते हैं।

संवेदनशील संवर्धन: इसमें से लगभग आधा टन यूरेनियम उस खतरनाक स्तर तक एनरिच किया जा चुका है, जो सीधे तौर पर हथियार बनाने के काम आता है।

सुरक्षित ठिकाने: माना जा रहा है कि इस घातक सामग्री का एक बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे बनी अभेद्य और सुरक्षित सुरंगों में छिपा कर रखा गया है।

बदलती शर्तें और बढ़ता गतिरोध :

वर्तमान में ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ एक नया और अधिक सख्त समझौता करना चाहता है। अमेरिका की दो स्पष्ट शर्तें हैं: पहली, ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन की क्षमता को पूरी तरह कम करे, और दूसरी, पिछले वर्षों में जमा किए गए परमाणु ईंधन के पूरे भंडार को सौंप दे। हालांकि, ईरान ने इन शर्तों को सिरे से खारिज कर दिया है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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