हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने फिर लगाया सैन्य प्रतिबंध, तेल आपूर्ति प्रभावित
ईरान ने रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर का नियंत्रण बहाल कर व्यापारिक जहाजों के लिए अनुमति अनिवार्य की, वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में भारी गिरावट की आशंका।

ईरान और ओमान के बीच स्थित रणनीतिक हॉर्मुज जलडमरूमध्य का सैटेलाइट चित्र
Hormuz Strait Crisis 2026 : मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। जिस हॉर्मुज की खाड़ी को दुनिया की आर्थिक रग कहा जाता है, वहां संकट के बादल गहरे हो गए हैं। शुक्रवार को जिस रास्ते को खोलने के ऐलान पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'थैंक्यू' पोस्ट किया था, शनिवार होते-होते ईरान ने उसी रास्ते पर फिर से कड़ा सैन्य पहरा बैठा दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव इस कदर बढ़ गया है कि अब वहां से गुजरने वाले जहाजों पर सीधे गोलीबारी की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है।
सैन्य नियंत्रण और ईरान की सख्त शर्तें
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने स्पष्ट कर दिया है कि हॉर्मुज की खाड़ी पर अब पूरी तरह से पहले जैसा कड़ा सैन्य नियंत्रण लागू रहेगा। IRGC के प्रवक्ता इब्राहिम जुलफागरी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि जब तक अमेरिका ईरानी जहाजों पर लगी पाबंदियों को पूरी तरह से नहीं हटाता, तब तक यह समुद्री मार्ग बंद रहेगा। इस रणनीतिक घेराबंदी को और कड़ा करते हुए ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने घोषणा की है कि अब इस रास्ते से गुजरने वाले हर कमर्शियल जहाज को IRGC की नौसेना से अनिवार्य रूप से इजाजत लेनी होगी। ईरान का यह रुख साफ करता है कि वह हॉर्मुज को एक सैन्य ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
तेल की सप्लाई ठप: इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट
हॉर्मुज में मचे इस बवाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, यह मानव इतिहास में तेल आपूर्ति का सबसे भयावह संकट साबित हो सकता है। आंकड़ों के मुताबिक, इस रास्ते के बंद होने से प्रतिदिन 1 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल की सप्लाई बाधित हो रही है। इतना ही नहीं, दुनिया भर में गैस की आपूर्ति में 20 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस नाकेबंदी का सीधा असर वैश्विक स्तर पर पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर पड़ने लगा है, जिससे आने वाले दिनों में महंगाई का बड़ा विस्फोट होने की आशंका है।
बीच समंदर गोलीबारी और जहाजों का पलायन :
युद्ध के इस माहौल में मानवीय और व्यापारिक खतरा चरम पर है। समाचार एजेंसी एपी (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, हॉर्मुज के रास्ते में कम से कम दो जहाजों पर गोलीबारी की गई है। इस हमले ने तेल टैंकरों और उन पर मौजूद क्रू मेंबर्स की जान जोखिम में डाल दी है। गौरतलब है कि इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर के बाद जब ईरान ने संक्षिप्त समय के लिए यह रास्ता खोला था, तब सैकड़ों जहाज उम्मीद के साथ इस ओर बढ़े थे। लेकिन अब स्थिति यह है कि सैकड़ों जहाजों का काफिला बीच रास्ते से वापस मुड़ने को मजबूर है, क्योंकि ईरान ने शांति की उम्मीदों को सैन्य नियंत्रण में बदल दिया है।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर: समुद्री लूट या सुरक्षा?
इस पूरे विवाद में ईरान ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। ईरान ने अमेरिकी नाकेबंदी को 'समुद्री लूट' और 'चोरी' करार दिया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका उसके जहाजों को अवैध रूप से रोक रहा है और उनकी मनमानी के जवाब में ईरान भी दूसरे देशों के जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा रहा है। यह समुद्री टकराव अब एक ऐसी कूटनीतिक जंग में तब्दील हो चुका है, जहां अंतरराष्ट्रीय नियमों की जगह बारूद और पाबंदियां फैसला कर रही हैं। हॉर्मुज की यह बंदी केवल एक क्षेत्र की जंग नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक भीषण आर्थिक सुनामी का संकेत है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
