ईरान में गृहयुद्ध जैसे हालात! 180 शहरों में उठी बगावत की आग; इंटरनेट ब्लैकआउट से मची चीख-पुकार
ईरान में महंगाई और गिरते रियाल के खिलाफ भड़का जनविद्रोह 180 शहरों में फैल गया है, जिसमें अब तक 65 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार ने इंटरनेट और उड़ानों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर देश को डिजिटल दुनिया से काट दिया है। अयातुल्ला खामेनेई ने इस हिंसा के लिए अमेरिका और ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि देश में गृहयुद्ध जैसे हालात बने हुए हैं।

iran anti government protests : ईरान इस वक्त अपने आधुनिक इतिहास के सबसे भीषण और हिंसक दौर से गुजर रहा है। 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के बाजारों से महंगाई और गिरते रियाल के खिलाफ भड़की असंतोष की चिंगारी अब एक राष्ट्रव्यापी दावानल बन चुकी है। देश के 31 प्रांतों के 180 शहरों में स्थित 512 स्थानों पर लोग सड़कों पर हैं और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली धार्मिक सरकार के खिलाफ आक्रोश चरम पर है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन ने पूरे देश में इंटरनेट और टेलीफोन सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे ईरान का शेष विश्व से संपर्क लगभग कट चुका है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) और एसोसिएटेड प्रेस की नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, 9 जनवरी को प्रदर्शन के 13वें दिन में प्रवेश करते ही मृतकों की संख्या बढ़कर 65 से अधिक हो गई है। हफ्तों तक चुप्पी साधे रखने के बाद, अंततः शुक्रवार को सरकारी मीडिया ने स्वीकार किया कि हिंसक झड़पों में लोग हताहत हुए हैं, हालांकि उन्होंने आधिकारिक आंकड़ों पर स्थिति स्पष्ट नहीं की। सरकार ने इस जनविद्रोह को दबाने के लिए कठोर रुख अख्तियार किया है और सरकारी मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया है कि इस हिंसा के पीछे अमेरिका और इज़रायल के 'आतंकवादी एजेंटों' का हाथ है, जो देश की स्थिरता को भंग करने का प्रयास कर रहे हैं।
राजनीतिक मोर्चे पर, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निशाने पर लिया है। खामेनेई ने ट्रंप को 'अहंकारी' करार देते हुए उन पर ईरानियों के खून से हाथ रंगने का गंभीर आरोप लगाया। दूसरी ओर, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंटरनेट ब्लैकआउट को सुरक्षा अधिकारियों का एक आवश्यक निर्णय बताया है ताकि 'परिस्थितियों' को नियंत्रित किया जा सके। इस अशांति का वैश्विक असर विमानन क्षेत्र पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। दुबई हवाई अड्डे की जानकारी के अनुसार, दुबई और ईरान के बीच कम से कम 17 महत्वपूर्ण उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जबकि तुर्की एयरलाइंस ने एहतियात के तौर पर ईरानी हवाई क्षेत्र का उपयोग करने वाली अपनी कई उड़ानें निरस्त कर दी हैं।
यह आंदोलन, जो शुरू में आर्थिक बदहाली के खिलाफ एक विरोध के रूप में देखा जा रहा था, अब सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन और व्यवस्था के खिलाफ एक बड़े संघर्ष का रूप ले चुका है। हवाई अड्डों पर पसरा सन्नाटा, बंद होते डिजिटल द्वार और सड़कों पर बहता लहू इस बात का संकेत है कि ईरान एक बेहद अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह सरकार विरोधी लहर किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करेगी या फिर इसे और भी अधिक कठोर सैन्य कार्रवाई के जरिए कुचल दिया जाएगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
