ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण के लिए 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' बनाई; अमेरिकी हथियारों की आमद के बीच वैश्विक तेल मार्ग पर नए नियम लागू।

Strait of Hormuz Iran Authority : पश्चिम एशिया में सुलगती जंग की चिंगारियों के बीच ईरान ने एक ऐसा रणनीतिक दांव चला है, जिसने पूरी दुनिया की आर्थिक और सैन्य धड़कनें बढ़ा दी हैं। वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए ईरान ने एक नई शक्तिशाली संस्था— "पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी" (PGSA) के गठन का औपचारिक ऐलान कर दिया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल द्वारा दी गई यह जानकारी महज एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि समुद्र के इस सबसे संवेदनशील संकरे रास्ते पर ईरान के पूर्ण वर्चस्व की घोषणा के रूप में देखी जा रही है। ऐसे समय में जब इजरायली मीडिया अमेरिकी हथियारों से लदे विमानों के पहुंचने और अपनी सेना के हाई अलर्ट पर होने का दावा कर रहा है, ईरान की इस नई निगरानी प्रणाली ने महायुद्ध की आशंकाओं को और अधिक बल दे दिया है।

ईरान द्वारा गठित यह नई अथॉरिटी (PGSA) होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली हर समुद्री गतिविधि पर 'रियल-टाइम' नजर रखेगी। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने इस योजना की रूपरेखा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि यह तंत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा और ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता की गारंटी देने के लिए तैयार किया गया है। हालांकि, इस 'पेशेवर तंत्र' के पीछे की मंशा काफी सख्त नजर आती है। अजीजी के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाली विशिष्ट सेवाओं के लिए अब एक निर्धारित शुल्क भी वसूला जाएगा। यह कदम वैश्विक व्यापारिक जहाजों के लिए न केवल आर्थिक बोझ बढ़ाएगा, बल्कि ईरान को इस मार्ग पर 'ट्रैफिक कंट्रोलर' की भूमिका में लाकर खड़ा कर देगा, जिससे वह जब चाहे किसी भी जहाज की आवाजाही को नियंत्रित या बाधित कर सकता है।

ईरान की इस नई व्यवस्था का सबसे विवादित पहलू "फ्रीडम प्रोजेक्ट" (Freedom Project) को लेकर है। तेहरान ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि यह नया सिस्टम और होर्मुज का यह रणनीतिक मार्ग तथाकथित फ्रीडम प्रोजेक्ट के संचालनकर्ताओं के लिए पूरी तरह बंद रहेगा। अजीजी ने सोशल मीडिया पर साफ लिखा कि इस प्रक्रिया का लाभ केवल उन्हीं वाणिज्यिक जहाजों और पक्षों को मिलेगा जो ईरान के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं। यह स्पष्ट रूप से उन पश्चिमी देशों और उनके सहयोगियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है, जो इस क्षेत्र में अपनी सैन्य और नौसैनिक उपस्थिति बढ़ा रहे हैं। ईरान का यह रुख संकेत देता है कि वह तेल की वैश्विक आपूर्ति को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में बढ़ चुका है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की भौगोलिक स्थिति को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि दुनिया का लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल व्यापार इसी 21 मील चौड़े रास्ते से होकर गुजरता है। यदि ईरान इस मार्ग पर नए ट्रांजिट नियम और सख्त अनुमति प्रणाली लागू करता है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा। इजरायल और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच, ईरान का यह 'मैरीटाइम मैनेजमेंट' न केवल कूटनीतिक दबाव बनाने का जरिया है, बल्कि यह क्षेत्र में सैन्य टकराव की स्थिति में एक निर्णायक मोर्चा साबित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात को लेकर चिंतित है कि क्या होर्मुज का यह नया पहरा दुनिया को एक और बड़े आर्थिक संकट या विनाशकारी युद्ध की ओर धकेल देगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story