ईरान में जन-विद्रोह का शंखनाद: धार्मिक सत्ता के खिलाफ सड़कों पर उतरा आक्रोश; ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी
ईरान में धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ जन-आक्रोश भड़क उठा है। 31 प्रांतों में फैले इस हिंसक प्रदर्शन में अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शनकारी शाह पहलवी की वापसी और इस्लामी गणराज्य के अंत की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि ईरान ने पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया है। जानिए इस ऐतिहासिक राजनीतिक संकट की पूरी रिपोर्ट।

Iran Anti-Khamenei Protests : ईरान के आधुनिक इतिहास में एक बार फिर बदलाव की ऐसी लहर उठी है जिसने तेहरान से लेकर सुदूर प्रांतों तक की नींव हिला दी है। 28 दिसंबर 2025 को रियाल की गिरती कीमतों और बढ़ती कमरतोड़ महंगाई के विरोध में शुरू हुआ एक आर्थिक प्रदर्शन अब पूरी तरह से एक राजनीतिक क्रांति में तब्दील हो चुका है। गुरुवार, 8 जनवरी 2026 को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों ने इस आंदोलन को बीते दो हफ्तों के सबसे रक्तरंजित मोड़ पर ला खड़ा किया है। तेहरान का ऐतिहासिक ग्रैंड बाजार बंद है और सड़कों पर उतरा जनसैलाब अब सिर्फ रोटी और रोजगार की नहीं, बल्कि मौजूदा इस्लामी गणराज्य के अंत और पूर्ण स्वतंत्रता की मांग कर रहा है।
देश के सभी 31 प्रांतों के लगभग 111 शहरों में यह विद्रोह जंगल की आग की तरह फैल चुका है। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना तीव्र है कि उन्होंने कई जगहों पर सरकारी वाहनों और सार्वजनिक संपत्ति को आग के हवाले कर दिया है। सड़कों पर गूंजते 'खामेनेई को मौत' और 'यह आखिरी लड़ाई है' जैसे नारों ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। विशेष रूप से, कई क्षेत्रों में पूर्व शाही परिवार के समर्थन में 'शाह पहलवी की वापसी' के नारे सुनाई दे रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि जनता अब शासन के स्वरूप में आमूल-चूल परिवर्तन चाहती है। इस संघर्ष में अब तक 34 नागरिकों और 4 सुरक्षाकर्मियों की जान जा चुकी है, जबकि 2,200 से अधिक लोगों को सलाखों के पीछे धकेल दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संकट ने महाशक्तियों के बीच तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर अत्यंत सख्त रुख अख्तियार करते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरानी प्रशासन ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग जारी रखा, तो अमेरिका 'जोरदार ताकत' के साथ जवाबी कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने ईरान की मौजूदा स्थिति को भयावह बताते हुए कहा कि यह देश 150 साल पीछे जा चुका है और वहां की जनता अब सिर्फ अपने देश के लिए बदलाव चाहती है। दूसरी ओर, ईरान के सरकारी तंत्र ने इन प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार दिया है। सरकारी मीडिया का दावा है कि अमेरिका और इजरायल के 'आतंकवादी एजेंट' देश में हिंसा भड़का रहे हैं।
सूचनाओं के प्रवाह को रोकने के लिए ईरानी सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट सेवाओं को ठप कर दिया है और लैंडलाइन कनेक्शन तक काट दिए गए हैं। विपक्षी नेता रजा पहलवी ने इस कदम की निंदा करते हुए कहा है कि सरकार ने संचार के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं ताकि दुनिया तक ईरानियों की आजादी की पुकार न पहुंच सके। आज ईरान एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहां एक तरफ दमनकारी सरकारी मशीनरी है और दूसरी तरफ अपनी खोई हुई पहचान और आर्थिक स्थिरता वापस पाने के लिए संघर्षरत जनता। आने वाले दिन न केवल ईरान के भविष्य को तय करेंगे, बल्कि मध्य पूर्व के राजनीतिक भूगोल पर भी गहरा प्रभाव डालेंगे।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
