अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव: ढालपुर मैदान में राजा की जलेब शुरू
हिमाचल के ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में शुरू हुए सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय उत्सव में भगवान रघुनाथ की रथयात्रा और पारंपरिक देव परंपराओं का विशेष महत्व है।

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के दौरान ढालपुर मैदान में पारंपरिक रथयात्रा और देव परंपराओं के साथ शामिल श्रद्धालु और देवलू.
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान राजा की जलेब शुरू हो गई है। सदियों पुरानी देव परंपराओं से जुड़े इस आयोजन के साथ कुल्लू की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत एक बार फिर केंद्र में आ गई है। 21 से 27 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं के आगमन, पारंपरिक रस्मों और धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व है।
कुल्लू के ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में आयोजित होने वाला यह उत्सव भगवान रघुनाथ की रथयात्रा और घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले देवी-देवताओं के समागम के लिए जाना जाता है। उत्सव के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वर्ष भी दशहरा उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है।
कुल्लू दशहरा की खासियत इसकी विशिष्ट देव परंपराएं हैं। देश के कई हिस्सों में विजयादशमी के दिन दशहरा उत्सव संपन्न होता है, जबकि कुल्लू में इसके बाद सात दिनों तक उत्सव की गतिविधियां जारी रहती हैं। भगवान रघुनाथ की रथयात्रा इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण है। इसमें देवी-देवताओं के साथ उनके देवलू और श्रद्धालु शामिल होते हैं।
उत्सव के दौरान पारंपरिक नाटी नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजन का हिस्सा हैं। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश की धार्मिक आस्था, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाला प्रमुख आयोजन है।

Pratahkal Bureau
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