क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस? जानें उन 5 बहादुरों की गाथा जिन्होंने इस दिन की नींव रखी
अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस 4 मई को मनाया जाता है, जो अग्निशमन कर्मियों के साहस, सेवा और बलिदान को समर्पित है। यह दिन शहीद फायरफाइटर्स की स्मृति और 11 सितंबर हमलों में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देता है। 1999 में ऑस्ट्रेलिया की जे.जे. एडमंडसन की पहल से इसकी शुरुआत हुई।

अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस का सूचनात्मक पोस्टर
अग्निशमन सेवा को समर्पित साहस, कर्तव्य और बलिदान की भावना को सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 4 मई को ‘अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस’ (International Firefighters’ Day - IFFD) मनाया जाता है। यह दिन उन अग्निशमन कर्मियों की याद में भी मनाया जाता है जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, साथ ही 11 सितंबर के आतंकी हमलों में शहीद हुए फायरफाइटर्स को भी श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
इस वैश्विक दिवस की नींव वर्ष 1999 में उस समय रखी गई जब ऑस्ट्रेलिया की महिला फायरफाइटर जे.जे. एडमंडसन ने 4 जनवरी 1999 को एक प्रस्ताव रखा। यह पहल 2 दिसंबर 1998 को ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया स्थित लिंटन में हुए भीषण जंगल की आग हादसे के बाद सामने आई, जिसमें पांच अग्निशमन कर्मियों की दर्दनाक मृत्यु हो गई थी। यह घटना अग्निशमन इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक मानी जाती है।
इस हादसे में गीलॉन्ग वेस्ट फायर ब्रिगेड के पांच बहादुर फायरफाइटर्स गैरी व्रेडेवल्ड, क्रिस्टोफर इवांस, स्टुअर्ट डेविडसन, जेसन थॉमस और मैथ्यू आर्मस्ट्रॉन्ग शहीद हो गए थे। अचानक मौसम परिवर्तन और तेज़ हवाओं के कारण उनकी दमकल गाड़ी आग की चपेट में आ गई, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर अग्निशमन कर्मियों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा को जन्म दिया।
अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस पर प्रतिवर्ष अनेक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इनमें सबसे प्रमुख ‘साउंड ऑफ’ परंपरा है, जो मई के पहले रविवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर 12 बजे आयोजित की जाती है। इस दौरान सभी फायर स्टेशन के सायरन 30 सेकंड तक बजाए जाते हैं, जिसके बाद एक मिनट का मौन रखकर शहीद फायरफाइटर्स को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह परंपरा वर्ष 2002 से लगातार जारी है और इसे वैश्विक स्तर पर अपनाया गया है।
इस दिवस के माध्यम से अग्नि सुरक्षा, प्रशिक्षण की आवश्यकता और जन-जागरूकता को बढ़ावा दिया जाता है। इसे अग्निशमन सेवाओं की क्षमता और तैयारी को मजबूत करने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में भी देखा जाता है, ताकि भविष्य में आपदाओं से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस का प्रतीक लाल और नीले रंग का रिबन होता है। यह रिबन 5 सेमी लंबा और 1 सेमी चौड़ा होता है, जिसमें लाल रंग आग का और नीला रंग जल का प्रतीक माना जाता है। दोनों रंग अग्निशमन कर्मियों के कार्यक्षेत्र और चुनौतियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसे पारंपरिक रूप से कोट के लैपल पर पहना जाता है।
इसी क्रम में भारत में राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा सप्ताह 2026 (14 अप्रैल से 20 अप्रैल) का आयोजन “सेफ स्कूल, सेफ हॉस्पिटल और फायर सेफ्टी अवेयर सोसाइटी – टुगेदर फॉर फायर प्रिवेंशन” थीम के साथ किया जाएगा। यह थीम विशेष रूप से उन स्थानों की सुरक्षा पर केंद्रित है जहां जोखिम अधिक होता है, साथ ही समाज में अग्नि सुरक्षा के प्रति सामूहिक जागरूकता बढ़ाने पर बल देती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
