संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हाल ही में भारत की विदेश नीति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह तालिबान के साथ पूरी तरह से अलगाव की नीति का पक्ष नहीं लेता, बल्कि अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ‘व्यावहारिक संवाद’ और रचनात्मक कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति लगातार अस्थिर बनी हुई है।

भारत के प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद में कहा कि केवल दंडात्मक कार्रवाई अफगानिस्तान में स्थायी शांति नहीं ला सकती। इसके बजाय, तालिबान के साथ संतुलित और सूझबूझ भरा संवाद करना ही क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के हित में होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह किसी भी तरह की आधिकारिक मान्यता या समूह के राजनीतिक आदर्शों का समर्थन नहीं है। भारत की नीति, तालिबान को मान्यता देने की बजाय, अफगानिस्तान में मौजूद वास्तविक सत्ता के साथ बातचीत और सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित है।

विदेश मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, भारत अफगानिस्तान में तालिबान के शासन को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं देता है। इसके बावजूद, अफगानिस्तान में भारतीय हितों, निवेश और मानवीय सहायता परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली ने व्यावहारिक सहयोग और संवाद की दिशा में कदम उठाए हैं। भारत ने पूर्व में कुछ संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों पर तालिबान के खिलाफ वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत का उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई से परहेज करना और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करना है।

भारत की नीति में मुख्य रूप से तीन आयाम शामिल हैं। पहला, अफगान नागरिकों के लिए मानवीय सहायता और विकास सहयोग, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, और बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट शामिल हैं। दूसरा, अफगानिस्तान की सुरक्षा सुनिश्चित करना ताकि भारतीय सीमा और क्षेत्रीय हितों पर किसी प्रकार का आतंकवादी खतरा न आए। और तीसरा, तालिबान के प्रतिनिधियों के साथ संवाद बनाए रखना, ताकि अफगानिस्तान में स्थिरता और आतंकवाद विरोधी उपायों पर सहयोग संभव हो सके।

हाल ही में भारत ने अपनी कूटनीतिक मिशन को काबुल में उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के रूप में अपग्रेड किया, जो अफगान सत्ता के साथ व्यावहारिक संपर्क और बातचीत को और मजबूत करेगा। यह कदम इस बात का संकेत है कि भारत तालिबान के साथ संतुलित सहयोग की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखी जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यह नीति पूरी तरह से रणनीतिक और वास्तविकतावादी दृष्टिकोण पर आधारित है। अफगानिस्तान में पूर्ण अलगाव या कठोर दंडात्मक नीति अपनाने से स्थिति और अस्थिर हो सकती थी। ऐसे में भारत का उद्देश्य न केवल अपने नागरिकों और निवेश की सुरक्षा करना है, बल्कि क्षेत्रीय शांति और अफगान स्थिरता को भी बनाए रखना है।

इस तरह, भारत का हालिया यूएन बयान स्पष्ट रूप से यह संकेत देता है कि नई दिल्ली तालिबान के साथ व्यावहारिक संवाद और कूटनीतिक संपर्क को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन यह किसी भी तरह की राजनीतिक मान्यता या समर्थन की स्थिति नहीं है। यह कदम न केवल अफगानिस्तान की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए सामरिक और कूटनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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