भारत का BIMREn मंच पर नया विजन ; बंगाल से उमड़ी ‘ब्लू इकोनॉमी’ की लहर
भारत ने कोच्चि में बिम्सटेक-भारत समुद्री अनुसंधान नेटवर्क (बीआईएमआरईएन) के पहले द्विवार्षिक सम्मेलन की मेजबानी कर बंगाल की खाड़ी में ब्लू इकोनॉमी सहयोग को नई दिशा दी। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में सदस्य देशों ने मिलकर समुद्री अनुसंधान और क्षेत्रीय विकास को मजबूत करने पर जोर दिया।

भारत ने कोच्चि में बिम्सटेक-भारत समुद्री अनुसंधान नेटवर्क (BIMREn) के पहले द्विवार्षिक सम्मेलन की मेजबानी कर एक नया इतिहास रच दिया है। तीन दिन तक चले इस सम्मेलन (4 से 6 नवंबर) में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में ब्लू इकोनॉमी यानी समुद्र आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने पर खास जोर दिया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह आयोजन मरीन साइंस और ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु परिवर्तन, समुद्र संरक्षण और मरीन रिसोर्स मैनेजमेंट पर गहन चर्चा की। इसके साथ ही युवा शोधकर्ताओं के बीच वैज्ञानिक नेटवर्क को मजबूत करने और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग के लिए नई नीतियों के निर्माण पर भी विचार-विमर्श हुआ।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि बीआईएमआरईएन की शुरुआत 2024 में भारत की पहल पर हुई थी। इसका उद्देश्य रिसर्च ग्रांट्स और पीएचडी फेलोशिप के ज़रिए सदस्य देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ाना है। इससे भारत के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों को बिम्सटेक देशों के रिसर्च केंद्रों से जोड़ा जा सकेगा, जिससे ज्ञान और तकनीक का आदान-प्रदान तेज़ी से हो सकेगा।
दरअसल, इस पहल की जड़ें 2022 में कोलंबो में हुए बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मरीन साइंस में सहयोग बढ़ाने के लिए BIMREN की घोषणा की थी। यह पहल भारत की “नेबरहुड फर्स्ट”, “एक्ट ईस्ट”, “इंडो-पैसिफिक” और “महासागर” नीतियों से भी जुड़ी हुई है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने का विज़न रखती हैं।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बीआईएमआरईएन अब तक बिम्सटेक देशों के 25 संस्थानों और 50 से ज्यादा शोधकर्ताओं को एक साथ ला चुका है। सम्मेलन के दौरान सभी देशों ने ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में साझा रणनीति बनाने और भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं पर काम करने का संकल्प दोहराया। इस आयोजन ने न सिर्फ क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा दी, बल्कि समुद्र को एक साझा संसाधन मानते हुए उसकी रक्षा और उपयोग के संतुलन का संदेश भी दिया।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
