एल नीनो से पैदा हुए संकट के बीच भारत की बड़ी पहल ; मलावी को 1,000 टन चावल भेजकर दी राहत
एल नीनो से उत्पन्न भीषण सूखे और खाद्य संकट से जूझ रहे अफ्रीकी देश मलावी की मदद के लिए भारत ने 1,000 मीट्रिक टन चावल की मानवीय सहायता भेजी है। लगभग 40 लाख लोग खाद्य असुरक्षा के खतरे में हैं।

भारत ने सूखे से जूझ रहे मलावी को सहायता भेजी।
अफ्रीका के दक्षिण-पूर्वी देश मलावी में सूखे और खाद्य संकट के बीच भारत ने मानवीय सहयोग का हाथ बढ़ाया है। एल नीनो से जुड़ी भीषण जलवायु परिस्थितियों के कारण पैदा हुए संकट से जूझ रहे इस देश की मदद के लिए भारत ने 1,000 मीट्रिक टन चावल की सहायता भेजी है। यह कदम न केवल मानवीय संवेदना का उदाहरण है, बल्कि वैश्विक दक्षिण के देशों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
सोमवार को भारत ने यह राहत सामग्री मलावी के लिए रवाना की। लगातार बिगड़ती जलवायु परिस्थितियों और अनियमित वर्षा के कारण वहां की कृषि व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। इस संकट के चलते लगभग 40 लाख लोग, जो देश की कुल आबादी का लगभग 22 प्रतिशत हैं, मार्च 2026 तक तीव्र खाद्य असुरक्षा के खतरे का सामना कर सकते हैं। वर्षा आधारित खेती पर निर्भर मलावी में सूखे ने कई जिलों को संकट की स्थिति में पहुंचा दिया है, जिसके बाद सरकार को कई क्षेत्रों में आपदा घोषित करनी पड़ी।
भारत द्वारा भेजी गई यह सहायता बिना किसी शर्त के मानवीय आधार पर दी गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह कदम वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सहयोग और साझेदारी की भारत की नीति को मजबूत करता है। इससे पहले भी भारत ने 2024 में मलावी और उसके पड़ोसी देशों को चावल भेजकर खाद्य संकट के समय सहायता प्रदान की थी।
राहत अभियान से जुड़े प्रमुख तथ्य:
- चावल की खेप महाराष्ट्र के न्हावा शेवा बंदरगाह से भेजी गई, जो भारत के प्रमुख समुद्री बंदरगाहों में से एक है।
- यह सहायता मलावी में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और सूखे से प्रभावित लोगों को राहत देने के उद्देश्य से भेजी गई है।
- भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे वैश्विक दक्षिण के देशों के प्रति भारत की मानवीय और सहयोगात्मक नीति का हिस्सा बताया है।
मलावी की अर्थव्यवस्था और आजीविका का बड़ा हिस्सा कृषि पर आधारित है। यहां की प्रमुख फसल मकई (मक्का) है, जो देश के अधिकांश लोगों का मुख्य भोजन भी है। लेकिन एल नीनो के प्रभाव से वर्षा का चक्र बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे फसलों को भारी नुकसान पहुंचा और खाद्य उत्पादन में तेज गिरावट आई।
India sends 1,000 metric tons of rice to Malawi to deal with drought. pic.twitter.com/AKZnVlYDFC
— Sidhant Sibal (@sidhant) March 9, 2026
मलावी कहां स्थित है:
मलावी दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक भू-आवेष्ठित (Landlocked) देश है। इसके पड़ोसी देशों में तंजानिया, मोज़ाम्बिक और ज़ाम्बिया शामिल हैं। यह देश मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है और यहां की बड़ी आबादी वर्षा आधारित खेती पर ही जीविका चलाती है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन या सूखे का प्रभाव यहां सीधे खाद्य सुरक्षा पर पड़ता है। aqविशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा संकट केवल एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन और वैश्विक खाद्य सुरक्षा से जुड़ी बड़ी चुनौती का संकेत भी है। ऐसे समय में भारत की ओर से दी गई यह सहायता अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अफ्रीकी देशों के साथ भारत के संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। खाद्यान्न, दवाइयों और आपदा राहत के माध्यम से भारत ने कई बार संकटग्रस्त देशों की मदद की है। मलावी को भेजी गई यह नई राहत खेप इस बात को रेखांकित करती है कि वैश्विक संकट की घड़ी में भारत खुद को केवल क्षेत्रीय शक्ति ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में भी स्थापित कर रहा है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
