वैश्विक व्यापार व्यवस्था के केंद्र में खड़े World Trade Organization (WTO) के ताज़ा शिखर सम्मेलन में भारत ने एक बार फिर विकासशील देशों की आवाज़ को मजबूती से उठाया है। बदलते वैश्विक आर्थिक समीकरणों और बढ़ते व्यापारिक तनावों के बीच भारत का रुख स्पष्ट, रणनीतिक और दूरगामी प्रभाव वाला दिखाई दे रहा है।

सम्मेलन की शुरुआत से ही भारत ने खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को प्राथमिकता दी। सरकार ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक भंडारण (Public Stockholding) के लिए स्थायी समाधान आवश्यक है, ताकि देश के करोड़ों लोगों की खाद्य आवश्यकताओं को सुरक्षित रखा जा सके। यह मुद्दा न केवल भारत के लिए, बल्कि कई विकासशील देशों के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन चुका है।

इसके साथ ही भारत ने किसानों और मछुआरों के हितों को भी वैश्विक मंच पर प्रमुखता से रखा। भारत का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियम ऐसे नहीं होने चाहिए जो कमजोर और आजीविका पर निर्भर समुदायों को नुकसान पहुंचाएं। यह दृष्टिकोण भारत की घरेलू नीतियों और सामाजिक-आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत ने ई-कॉमर्स से जुड़े नियमों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। भारत ने डिजिटल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी न लगाने के नियम को स्थायी बनाने का विरोध किया है। सरकार का मानना है कि इससे विकासशील देशों की नीतिगत स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है और घरेलू उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है।


सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:

  • WTO सुधार: भारत सुधार का समर्थन करता है, लेकिन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यह विकासशील देशों के लिए न्यायसंगत हो।
  • ई-कॉमर्स नियम: डिजिटल व्यापार पर संतुलित और लचीली नीतियों की मांग।
  • मत्स्य पालन सब्सिडी और कृषि: पर्यावरणीय स्थिरता और आजीविका के बीच संतुलन की चुनौती।
  • निवेश सुविधा: गरीब देशों में निवेश बढ़ाने के लिए सहयोगी ढांचा।

वैश्विक स्तर पर यह सम्मेलन गहरे मतभेदों के बीच हो रहा है। एक ओर अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे विकसित देश WTO में संरचनात्मक सुधारों की वकालत कर रहे हैं, वहीं भारत समानता, न्याय और विकास के सिद्धांतों पर जोर दे रहा है। इन मतभेदों ने यह चिंता भी बढ़ा दी है कि यदि सहमति नहीं बनती, तो WTO की प्रभावशीलता कमजोर पड़ सकती है।


भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल कर रहे हैं, जो विभिन्न मंचों पर भारत की नीतियों और चिंताओं को मजबूती से प्रस्तुत कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में संतुलन और समावेशिता अनिवार्य है।

समग्र रूप से, इस शिखर सम्मेलन में भारत ने खुद को “ग्लोबल साउथ” की मजबूत आवाज़ के रूप में स्थापित किया है। निष्पक्ष व्यापार नियम, घरेलू कृषि की सुरक्षा और संतुलित डिजिटल अर्थव्यवस्था की वकालत करते हुए भारत ने यह संकेत दिया है कि वह केवल अपने हितों के लिए नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक संतुलन के लिए भी प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में इस रुख का अंतरराष्ट्रीय व्यापार और नीति निर्माण पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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