Strait of Hormuz blockade : दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में इस समय एक अभूतपूर्व शक्ति प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी के पानी में आग लगा दी है, जहाँ अमेरिकी नौसेना की भारी तैनाती के बावजूद ईरान ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है। वर्तमान परिस्थितियों ने न केवल वैश्विक नौसैनिक शक्ति की सीमाओं को उजागर किया है, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया है कि आधुनिक युग में किसी भी जलमार्ग की पूर्ण नाकेबंदी करना लगभग असंभव है। अमेरिकी युद्धपोतों की पैनी नजर और सख्त पाबंदियों के बावजूद दर्जनों तेल टैंकर इस चक्रव्यूह को भेदने में सफल रहे हैं, जो सीधे तौर पर अमेरिकी रणनीतिक दबाव को चुनौती दे रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका और उसके हितों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण अध्याय बनकर उभरी है। हाल ही में भारतीय टैंकर ‘देश गरिमा’ ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए कतर के रस लाफान से 97,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर मुंबई के तट पर सफलतापूर्वक लंगर डाला। इस यात्रा के दौरान जहाज को ईरानी फायरिंग का सामना भी करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद वह सुरक्षित अपनी मंजिल तक पहुंचने में सफल रहा। रिपोर्ट्स बताती हैं कि 13 अप्रैल को शुरू हुई अमेरिकी नाकेबंदी के बाद से अब तक 30 से अधिक टैंकर इस क्षेत्र को पार कर चुके हैं। इनमें से कम से कम 34 टैंकरों का सीधा संबंध ईरान से बताया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि ईरान की तेल आपूर्ति श्रृंखला अभी भी सक्रिय है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन जहाजों ने वैकल्पिक समुद्री रास्तों का बड़ी चतुराई से उपयोग किया है। खार्ग द्वीप से कच्चा तेल लोड करने के बाद ये टैंकर फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के माध्यम से आगे बढ़ते हैं। एक प्रमुख मार्ग पाकिस्तान के मकरान तट के साथ-साथ गुजरता है, जहाँ जहाज ईरानी जलक्षेत्र से सीधे पाकिस्तानी जलक्षेत्र में प्रवेश करते हैं। दूसरा मार्ग ईरान के तट के करीब से होते हुए चाबहार पोर्ट तक जाता है, जहाँ से जहाज दक्षिण की ओर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र का रुख करते हुए भारत के पश्चिमी तटों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात और केरल की ओर बढ़ जाते हैं। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत ‘इनोसेंट पैसेज’ का अधिकार जहाजों को बिना किसी बाधा के गुजरने की अनुमति देता है, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच जटिल कूटनीतिक संबंधों के कारण पाकिस्तानी जलक्षेत्र का उपयोग करना सदैव जोखिम भरा और व्यावहारिक रूप से कठिन बना रहता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि इस नाकेबंदी को एक बड़ी सफलता करार दिया है और दावा किया है कि 28 जहाजों को सफलतापूर्वक वापस लौटाया गया है, लेकिन धरातल की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों की सीमाओं के कारण अमेरिकी नौसेना किसी अन्य देश के संप्रभु जलक्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकती, जिसका लाभ उठाकर टैंकर सुरक्षित निकल रहे हैं। भारतीय नौसेना भी इस संकट की घड़ी में अपने व्यावसायिक जहाजों के लिए ढाल बनकर खड़ी है। ओमान की खाड़ी में भारतीय युद्धपोतों द्वारा दी जा रही एस्कॉर्ट सेवा और उच्च स्तरीय कूटनीतिक समन्वय ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कोई आंच न आए। अंततः, होर्मुज की यह नाकेबंदी यह स्पष्ट करती है कि भौगोलिक सीमाओं और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों के जटिल जाल में केवल सैन्य शक्ति ही पर्याप्त नहीं है; यहाँ कूटनीति और भूगोल की समझ ही अंतिम विजेता तय करती है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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