CP Radhakrishnan Sri Lanka visit : भारत और श्रीलंका के कूटनीतिक संबंधों में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है जब भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर कोलंबो पहुंचे। यह दौरा कई मायनों में अभूतपूर्व है क्योंकि भारतीय गणतंत्र के इतिहास में यह किसी भी उपराष्ट्रपति की पहली आधिकारिक श्रीलंका यात्रा है। कोलंबो पहुंचने पर उपराष्ट्रपति का भव्य स्वागत पारंपरिक कंदियन नृत्य प्रदर्शन के साथ किया गया, जो दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों की एक झलक पेश करता है। अपनी यात्रा के पहले दिन उन्होंने राष्ट्रपति सचिवालय में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की, जिसमें दोनों देशों के साझा भविष्य की रूपरेखा तैयार की गई।

बैठक के दौरान दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने सदियों पुराने साझा इतिहास, मजबूत सभ्यतागत मूल्यों और जन-जन के बीच के संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने पर विस्तृत चर्चा की। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति दिसानायके के साथ द्विपक्षीय संबंधों के उन तमाम पहलुओं को खंगाला जो दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए आवश्यक हैं। इस संवाद का मुख्य केंद्र बिंदु न केवल राजनीतिक संबंध थे, बल्कि आर्थिक और मानवीय सहयोग भी रहा। बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयानों में इस बात की पुष्टि की गई कि भारत अपने पड़ोसी देश की प्रगति और संकट के समय में उसकी सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान उपराष्ट्रपति ने विशेष रूप से 'इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट' और श्रीलंका में आए चक्रवात 'दित्वाह' से उत्पन्न विनाश के बाद के पुनर्वास कार्यों पर चर्चा की। भारत ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए 450 मिलियन डॉलर के विशाल पैकेज के तहत जारी परियोजनाओं की समीक्षा की, जिसमें भारतीय मूल के तमिल समुदाय के पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, एक लंबे समय से लंबित संवेदनशील मुद्दे 'मछुआरों की समस्या' पर भी दोनों नेताओं ने विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि इस मसले को मानवीय दृष्टिकोण से सुलझाया जाना चाहिए ताकि दोनों देशों के तटीय समुदायों की आजीविका सुरक्षित रहे।

अपनी इस ऐतिहासिक यात्रा के दूसरे दिन उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन 'इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट' के तीसरे चरण के तहत निर्मित आवासों को तमिल समुदाय के लाभार्थियों को सौंपेंगे। यह पहल भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का एक जीवंत उदाहरण है, जो दर्शाता है कि नई दिल्ली कोलंबो के साथ केवल कागजी समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर जीवन बदलने वाले बदलाव ला रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को और अधिक मजबूत करेगा और भविष्य में द्विपक्षीय व्यापार एवं सुरक्षा सहयोग के नए द्वार खोलेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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