भारत की फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री वर्तमान समय में एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रही है। लंबे समय तक जेनरिक दवाओं के निर्माण में वैश्विक नेतृत्व करने वाली यह इंडस्ट्री अब नवाचार और उच्च मूल्य वाली दवाओं की ओर अपने कदम बढ़ा रही है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने हाल ही में इस बदलाव पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारतीय फार्मा कंपनियाँ अब बायोसिमिलर्स, पेप्टाइड्स, जटिल जेनरिक और अगली पीढ़ी के बायोलॉजिक्स का उत्पादन कर रही हैं।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारतीय फार्मा निर्यात 30.46 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, और यह दवाएँ 1,150 से अधिक देशों तक पहुँच रही हैं। इस उपलब्धि ने भारत को "विश्व की फार्मेसी" के रूप में एक बार फिर स्थापित किया है। निर्यात के इस विस्तार के साथ, भारतीय फार्मा उद्योग ने वैश्विक स्वास्थ्य बाज़ार में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।

दूसरी ओर, स्विट्ज़रलैंड की फार्मा इंडस्ट्री भी अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है। नोवार्टिस और लोंज़ा जैसी प्रमुख कंपनियाँ अब पारंपरिक गोलियों और कैप्सूल उत्पादन को कम करके सेल थेरेपी, RNA-आधारित दवाओं और बायोलॉजिक्स पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं। नोवार्टिस ने हाल ही में अपने स्टीन प्लांट में 550 नौकरियों में कटौती की घोषणा की, जबकि लोंज़ा ने अपने उत्पादन सुविधा के लिए GMP अनुमोदन प्राप्त किया। इस बदलाव का उद्देश्य उच्च मूल्य वाली और जटिल चिकित्सा उत्पादों की वैश्विक मांग को पूरा करना है।

भारत और स्विट्ज़रलैंड के बीच फार्मा सहयोग भी नई ऊँचाइयों को छू रहा है। 27 नवंबर 2025 को भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्विट्ज़रलैंड की आर्थिक मामलों की सचिव हेलेन बडलिगर आर्टिएडा से मुलाकात की। इस बैठक में R&D, निवेश और फार्मास्यूटिकल नवाचार में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। यह कदम भारत-ईएफ़टीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के तहत आया है, जो दोनों देशों के बीच फार्मा क्षेत्र में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

स्विट्ज़रलैंड की प्रमुख फार्मा कंपनी रोश ने भारत में अगले पांच वर्षों में 1.5 अरब स्विस फ़्रैंक का निवेश करने की घोषणा की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय बाजार और निर्माण क्षमता अब वैश्विक फार्मा रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। इस सहयोग से न केवल भारत के फार्मा उद्योग की नवाचार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि स्विट्ज़रलैंड की उन्नत तकनीक और विशेषज्ञता का लाभ भी वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में भारतीय कंपनियों को मिलेगा।

भारत और स्विट्ज़रलैंड का यह फार्मास्यूटिकल सहयोग भविष्य में दोनों देशों के लिए रणनीतिक, आर्थिक और स्वास्थ्य लाभ का मार्ग प्रशस्त करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गठजोड़ भारत को उच्च मूल्य वाली दवाओं के क्षेत्र में वैश्विक खिलाड़ी बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम देगा।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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