Nepal India border customs duty news : भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने 'रोटी-बेटी' के रिश्तों और खुली सीमा के सुगम व्यापार पर अब कस्टम ड्यूटी की कड़ी नजर लग गई है। नेपाल की नई सरकार ने सीमावर्ती व्यापार को लेकर अपने तेवर सख्त करते हुए एक ऐसा आदेश जारी किया है, जिसने बिहार से सटे सीमावर्ती बाजारों की कमर तोड़ दी है। नए नियमों के मुताबिक, अब भारत से की जाने वाली मात्र 100 रुपये से अधिक की किसी भी खरीदारी पर नेपाल के नागरिकों को 'भंसार' यानी कस्टम ड्यूटी देना अनिवार्य होगा। इस फरमान ने न केवल आम खरीदारों की जेब पर बोझ डाल दिया है, बल्कि शादी-ब्याह के इस सीजन में सीमावर्ती करीब 50 ग्रामीण बाजारों का कारोबार भी ठप होने की कगार पर पहुंचा दिया है।

बिहार के साथ साझा होने वाली 378 किलोमीटर लंबी खुली सीमा पर दशकों से यह परंपरा रही है कि नेपाल के नागरिक दैनिक उपभोग की वस्तुओं जैसे दूध, सब्जी, मसाले, कपड़े और दवाओं के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर रहते थे। पहले छोटी-मोटी खरीदारी के लिए सीमा पर तैनात अधिकारी रियायत दे दिया करते थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। नेपाल के राष्ट्रीय सुरक्षा बल ने लाउडस्पीकरों के जरिए आधिकारिक घोषणा कर दी है कि अब आम नागरिकों, सरकारी कर्मचारियों या किसी एनजीओ कार्यकर्ता को कोई विशेष छूट नहीं मिलेगी। खरीदे गए सामान की श्रेणी के आधार पर लोगों को अब कुल कीमत का 5 से 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैक्स देना पड़ रहा है, जिससे मधेश प्रांत के छह जिलों के मध्यमवर्गीय परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह चरमरा गया है।

इस नीतिगत बदलाव का सबसे गहरा असर बिहार के स्थानीय व्यापारियों पर पड़ा है, जिनकी रोजी-रोटी का मुख्य आधार नेपाली ग्राहक हैं। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि केक, बिस्किट से लेकर सीमेंट और बिजली के उपकरणों तक, हर सामान की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश की सीमा पर पहले से ही लागू इस सख्ती के बाद अब बिहार बॉर्डर पर भी भंसार चौकियों ने जांच तेज कर दी है। सीमा पार से आने वाले हर झोले और बैग की बारीकी से तलाशी ली जा रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ₹100 की सीमा का उल्लंघन न हो।

नेपाल सरकार का यह कदम भले ही अपने राजस्व को बढ़ाने और घरेलू बाजार को सुरक्षा देने के उद्देश्य से उठाया गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इसने दोनों देशों के सीमावर्ती समुदायों के बीच आर्थिक और सामाजिक दबाव बढ़ा दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि टैक्स की यह मार इसी तरह बनी रही, तो आने वाले समय में सीमावर्ती क्षेत्रों के पारंपरिक व्यापारिक ढांचे में स्थायी बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल, लाउडस्पीकर से गूंजती चेतावनियों और भंसार चौकियों पर लगने वाली लंबी कतारों ने भारत-नेपाल सीमा की रौनक को चिंता और सन्नाटे में बदल दिया है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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