भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 8वें भारत-जापान हिंद-प्रशांत फोरम में भाग लेते हुए भारत-जापान संबंधों को नई दिशा और गति देने की बात कही। इस कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि पिछले दशकों में दोनों देशों के बीच साझेदारी और भी मजबूत हुई है और अब यह रिश्ता रणनीतिक और आर्थिक स्थिरता का प्रमुख स्तंभ बन चुका है। उन्होंने बताया कि अगले दस वर्षों में भारत और जापान 10 ट्रिलियन येन के निवेश लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम करेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और नवाचार को नई ऊर्जा मिलेगी।

विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत-जापान साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन का आधार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में दोनों देशों को आपूर्ति श्रृंखला, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, खनिज संसाधन और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहिए। जयशंकर ने कहा कि भारत और जापान जैसे लोकतांत्रिक और समुद्री राष्ट्रों की हिंद-प्रशांत क्षेत्र के विकास और सुरक्षा में बड़ी भूमिका है, और यही क्षेत्र आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची के बीच हाल ही में हुई बातचीत ने इस साझेदारी की प्राथमिकता को और स्पष्ट किया है। अगस्त में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा ने दोनों देशों के साझा दृष्टिकोण को और मजबूत किया, जिसमें तकनीकी नवाचार, हरित विकास और क्षेत्रीय स्थिरता को केंद्र में रखा गया है।

इस बीच, जयशंकर ने नई दिल्ली में इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार से भी मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने, क्षेत्रीय सुरक्षा और गाजा शांति योजना पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक साझेदारी कई स्तरों पर गहराती जा रही है और दोनों देश आतंकवाद के सभी रूपों के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति पर सहमत हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि इजरायल के साथ बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने और प्रशिक्षण संबंधी समझौते दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।

गिदोन सार ने भी इस मुलाकात पर संतोष जताते हुए कहा कि भारत न सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, बल्कि सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था भी है। उन्होंने भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बताते हुए कहा कि दोनों देशों का साझा लक्ष्य दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाना है।

जयशंकर के इन बयानों ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति और आर्थिक सहयोग के केंद्र में तेजी से उभर रहा है। भारत-जापान की साझेदारी जहां एशिया के विकास की नई कहानी लिख रही है, वहीं भारत-इजरायल के रिश्ते सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग का नया अध्याय खोल रहे हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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