भारत-इजराइल के बीच फिर शुरू होगी 'व्यापार की नई पारी': मई में होने वाली FTA वार्ता से क्या बदलेगा?
भारत और इजराइल ने मई 2026 में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए अगले दौर की वार्ता आयोजित करने का निर्णय लिया है। दिल्ली में सफल वार्ता के बाद अब इजराइल में आमने-सामने की चर्चा होगी, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

PM Modi with Israeli PM Benjamin Netanyahu
भारत और इजराइल के व्यापारिक संबंधों में नया मोड़: मई में होगी FTA पर अहम चर्चा
भारत और इजराइल के बीच दोस्ती अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक मजबूत आर्थिक साझेदारी में तब्दील हो रही है। वाणिज्य मंत्रालय (Commerce Ministry) ने हाल ही में घोषणा की है कि दोनों देश प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत जारी रखने के लिए मई 2026 में इजराइल में मुलाकात करेंगे। यह घोषणा नई दिल्ली में हुई चार दिवसीय सफल वार्ता के समापन के बाद की गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह वार्ता?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजराइल यात्रा के दौरान उन्होंने नेसेट (Knesset) में दिए अपने भाषण में एक "महत्वाकांक्षी FTA" को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने पर जोर दिया था। इस समझौते का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों के बीच मौजूद उन व्यापारिक संभावनाओं को हकीकत में बदलना है, जिनका अभी तक पूरी तरह से दोहन नहीं हो पाया है।
भारत और इजराइल के बीच व्यापार के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ आपसी सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। मई में होने वाली अगली बैठक इन संभावनाओं को धरातल पर उतारने का काम करेगी।
किन क्षेत्रों पर रहेगा मुख्य ध्यान?
दोनों देशों के बीच होने वाली यह चर्चा काफी व्यापक है। इसमें निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है:
- माल और सेवाओं का व्यापार: आयात-निर्यात शुल्क को कम करना या समाप्त करना।
- रूल्स ऑफ ओरिजिन: यह तय करना कि माल का उत्पादन वास्तव में कहाँ हुआ है।
- तकनीकी बाधाएं (TBT): व्यापार में आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों को दूर करना।
- डिजिटल व्यापार और बौद्धिक संपदा (IPR): नए युग की तकनीक और अधिकारों पर सहयोग।
- निवेश सुगमता: दोनों देशों के व्यापारियों के लिए निवेश की प्रक्रिया को सरल बनाना।
व्यापार के वर्तमान आंकड़े और चुनौतियां
पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक परिस्थितियों और क्षेत्रीय तनाव के कारण द्विपक्षीय व्यापार में कुछ गिरावट देखी गई है।
- निर्यात में गिरावट: वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इजराइल को भारत का निर्यात 52% गिरकर 2.14 बिलियन डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष 4.52 बिलियन डॉलर था।
- कुल व्यापार: पिछले वित्त वर्ष में कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 3.62 बिलियन डॉलर रहा।
भारत वर्तमान में एशिया में इजराइल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। हालांकि व्यापार का एक बड़ा हिस्सा अभी भी हीरे, पेट्रोलियम उत्पादों और रसायनों तक सीमित है, लेकिन अब दोनों पक्ष मशीनरी, टेक्सटाइल, कृषि, चिकित्सा उपकरण और उच्च-तकनीक (High-tech) जैसे क्षेत्रों में विस्तार करना चाहते हैं।
FTA से क्या होगा फायदा?
मुक्त व्यापार समझौते का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि दोनों देश एक-दूसरे के सामान पर लगने वाले आयात शुल्क (Import Duty) को या तो बिल्कुल खत्म कर देते हैं या बहुत कम कर देते हैं। इससे भारतीय सामान इजराइल के बाजार में सस्ता होगा और इजराइली तकनीक भारतीय उद्योगों के लिए आसानी से उपलब्ध होगी।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारत और इजराइल इस समझौते को दो चरणों में लागू करने पर भी विचार कर रहे हैं। पहले चरण में उन क्षेत्रों (Low-hanging fruits) पर ध्यान दिया जाएगा जहाँ सहमति बनाना आसान है, ताकि व्यापारिक समुदाय को जल्द से जल्द लाभ मिल सके।
मई 2026 में होने वाली बैठक केवल व्यापारिक आंकड़ों पर चर्चा नहीं होगी, बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भरता और इजराइल की नवाचार (Innovation) शक्ति को जोड़ने का एक पुल बनेगी। भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार अजय भादू (अतिरिक्त सचिव, वाणिज्य विभाग) और इजराइल की ओर से यिफ़त एलोन पेरेल इस वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। यह समझौता न केवल व्यापार बढ़ाएगा बल्कि रक्षा, एआई (AI) और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी भारत-इजराइल की 'स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' को नई मजबूती देगा।

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