भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह आज से, दिल्ली में जुटेगा वैश्विक जल समुदाय
जल शक्ति मंत्रालय के इस आयोजन में टिकाऊ प्रबंधन, जल जीवन मिशन और नमामि गंगे की सफलताओं से वैश्विक स्तर पर नीतियां बनाने पर चर्चा होगी।

जल प्रबंधन का डिजिटल ग्राफिक्स, यह तस्वीर काल्पनिक है और एआई द्वारा केवल संदर्भ के लिए बनाई गई है।
22 से 26 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली में भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। जलवायु के प्रति लचीले जल प्रबंधन की थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में जल सुरक्षा, तकनीक, वित्त, योजनाओं के क्रियान्वयन और जनभागीदारी पर साझा चर्चा होगी। आयोजन जल शक्ति मंत्रालय कर रहा है।
जल एक ऐसा साझा संसाधन है, जो नदियों, भूजल और बारिश के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों को जोड़ता है। नदियां प्रशासनिक सीमाओं को नहीं पहचानतीं, जबकि भूजल स्रोत कई समुदायों की जरूरतें पूरी कर सकते हैं। आज होने वाली बारिश आगे चलकर पीने के पानी, सिंचाई, भूजल या नदी के प्रवाह का आधार बनती है। इसी वजह से आने वाली पीढ़ियों के लिए जल को सुरक्षित रखना साझा जिम्मेदारी के रूप में सामने आता है।
भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह में वैश्विक जल समुदाय के साथ जलवायु परिवर्तन के दौर में जल प्रबंधन को लेकर चर्चा करेगा। इस वर्ष की थीम ‘जलवायु के प्रति लचीला जल प्रबंधन’ है। जलवायु परिवर्तन के कारण जल चक्र लगातार अनिश्चित होता जा रहा है, ऐसे में आयोजन का विषय महत्वपूर्ण माना गया है।
भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह ऐसा मंच है, जहां सरकारें, विशेषज्ञ, उद्योग जगत, समुदाय और अंतरराष्ट्रीय साझेदार अपने अनुभव, तकनीक और विचार साझा कर सकते हैं तथा भविष्य के लिए साझेदारियां बना सकते हैं। इसका उद्देश्य हालिया विभागीय जल शिखर सम्मेलन की भावना और उससे मिली सीख को आगे बढ़ाना भी है। इस सम्मेलन का विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखा था। इसमें भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने जल क्षेत्र की चुनौतियों पर चर्चा की और अपने अनुभव साझा किए।
भारत जल और स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं को बड़े स्तर पर लागू करने के अनुभव के साथ इस संवाद में शामिल होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण भारत में 15.9 करोड़ से अधिक घरों तक नल से पानी पहुंचाया गया है। वर्ष 2019 में ऐसे घरों की संख्या 3.23 करोड़ थी। जल जीवन मिशन 2.0 का मुख्य उद्देश्य जलापूर्ति के बुनियादी ढांचे को भरोसेमंद सार्वजनिक सेवा व्यवस्था में बदलना है। इसके तहत ग्राम पंचायतों और उनकी ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति सेवाओं के संचालन, रखरखाव और निगरानी के लिए सक्षम बनाया जा रहा है। इन्हें स्थानीय स्तर पर छोटी जल सेवा इकाइयों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
जल सेवा आकांक्षी ग्राम पंचायत के नेतृत्व में की जाने वाली डिजिटल पहल है। इसके तहत हर घर जल वाले गांवों में पीने के पानी की नियमितता, पर्याप्तता, गुणवत्ता और स्थिरता का आकलन किया जाता है। इसमें ग्राम पंचायतों और गांव की संस्थाओं को आकलन की प्रक्रिया के केंद्र में रखा गया है।
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा और उसकी सहायक नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसमें सीवेज से जुड़े बुनियादी ढांचे और प्रदूषण कम करने के साथ नदी के पर्यावरण को बहाल करने, जैव विविधता के संरक्षण और लोगों की भागीदारी पर ध्यान दिया गया है। इसके तहत 527 से अधिक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें 367 पूरी हो चुकी हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन 4,263 मिलियन लीटर सीवेज के शोधन की क्षमता तैयार की गई है।
स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए हैं। इसके दूसरे चरण में ठोस और तरल कचरे के प्रबंधन पर ध्यान दिया गया है। घरों और सामुदायिक स्तर पर इस्तेमाल के बाद निकलने वाले पानी यानी ग्रे-वॉटर के प्रबंधन के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
इन योजनाओं में ‘जनभागीदारी’ को महत्वपूर्ण माना गया है। ‘जल संचय जनभागीदारी’ और ‘कैच द रेन’ (वर्षा जल संचयन) जैसे अभियानों के माध्यम से जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर लोगों की आदत और जनआंदोलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जलवायु के अनुकूल जल प्रबंधन तभी सफल हो सकता है, जब स्थानीय लोग इसे समझें, अपनी जिम्मेदारी मानें और इसे लंबे समय तक बनाए रखें।
भारत के अनुभव से यह भी सामने आता है कि जल संबंधी चुनौतियों का कोई एक समाधान नहीं हो सकता। हिमालयी राज्य की जरूरतें अलग होती हैं, जबकि तेजी से बढ़ते शहर की चुनौतियां ग्रामीण समुदाय से अलग होती हैं। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भूजल स्तर बढ़ाने, सिंचाई व्यवस्था के सामुदायिक प्रबंधन और इस्तेमाल किए जा चुके पानी के दोबारा उपयोग जैसे क्षेत्रों में व्यापक अनुभव है।
तकनीक के साथ बेहतर आंकड़ों, वैज्ञानिक मॉडलों और डिजिटल प्रणालियों की मदद से पानी की उपलब्धता में बदलाव को समझने, संभावित खतरों का पहले से अनुमान लगाने और पानी का अधिक कुशलता से इस्तेमाल करने पर भी जोर होगा। ‘सुजलम भारत’ डिजिटल सार्वजनिक ढांचे का इस्तेमाल बेहतर योजना बनाने, जल स्रोतों को टिकाऊ बनाए रखने, कामकाज की निगरानी करने और नागरिकों की जरूरतों के अनुसार शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है।
22 से 26 सितंबर तक भारत मंडपम में होने वाला भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह नेतृत्व, विज्ञान, योजनाओं का क्रियान्वयन, तकनीक, वित्त और जनभागीदारी को एक साझा मंच पर लाएगा। जलवायु परिवर्तन के कारण जल चक्र अधिक अनिश्चित हो सकता है, ऐसे में जल सुरक्षा से जुड़े प्रयासों में सामूहिक, वैज्ञानिक, समावेशी और निरंतर दृष्टिकोण पर जोर दिया जा रहा है।

Pratahkal Bureau
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