स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के बीच डीजीएस ने रूसी तेल जहाजों के लिए बीमा कंपनियों की संख्या बढ़ाई, ताकि 2030 तक कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। पढ़े रिपोर्ट

India Russia Oil Deal 2030 : मिडल ईस्ट के समंदर में उठती युद्ध की लपटों और अमेरिका-इरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में नाकेबंदी की आशंका से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे नाजुक वक्त में, जब दुनिया ऊर्जा संकट के डर से कांप रही है, भारत ने एक बेहद दूरदर्शी और साहसिक रणनीतिक कदम उठाया है। भारत ने न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता किया है, बल्कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच रूस के साथ मिलकर एक ऐसा 'सुरक्षा कवच' तैयार किया है, जो साल 2030 तक देश की तेल आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखेगा।

रूसी बीमा कंपनियों का जाल और भारत की रणनीति :

दरअसल, रूस पर लगे कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण यूरोप की दिग्गज बीमा कंपनियों ने रूसी तेल ले जाने वाले जहाजों को बीमा देना बंद या कम कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुसार, बिना 'प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी' (P&I) कवर के कोई भी जहाज समंदर में कदम नहीं रख सकता। भारत के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि वह अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा रूस से रियायती दरों पर खरीद रहा है। इस बाधा को जड़ से खत्म करने के लिए भारत के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। भारत ने अब रूसी तेल लाने वाले जहाजों के लिए बीमा देने वाली रूसी कंपनियों की संख्या 8 से बढ़ाकर 11 कर दी है।

2030 तक का फुलप्रूफ प्लान : इन दिग्गजों को मिली मंजूरी

भारत ने इस बार केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि लंबी अवधि का दांव खेला है। डीजीएस ने रूसी बीमा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों को लंबी अवधि के लिए हरी झंडी दिखाई है:

  • दीर्घकालिक मंजूरी (2030 तक) : VSK, सोगाज़ (Sogaz) और अल्फास्ट्राखोवानी (AlfaStrakhovanie) जैसी कंपनियों को साल 2030 तक के लिए अधिकृत किया गया है।
  • मध्यम अवधि की मंजूरी (2027 तक) : दुनिया की बड़ी कंपनियों में शुमार 'गज़प्रोम इंश्योरेंस' और 'रोसगोस्त्राख' को फरवरी 2027 तक भारत के साथ काम करने की अनुमति दी गई है।
  • विविध विकल्प : भारत ने अपनी निर्भरता को बांटने के लिए दुबई स्थित 'इस्लामिक प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लब' को भी फरवरी 2027 तक का लाइसेंस दिया है, ताकि संकट के समय विकल्पों की कमी न रहे।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट और भारत की ढाल :

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज'—जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है—वहां युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश होने के नाते भारत के लिए यह रास्ता 'लाइफलाइन' है। अगर यहाँ सप्लाई रुकती है, तो घरेलू बाजार में हाहाकार मच सकता था। लेकिन रूस के साथ इस बीमा समझौते के जरिए भारत ने एक वैकल्पिक और सुरक्षित रास्ता साफ कर लिया है। अब रूसी तेल के टैंकरों को पश्चिमी देशों की कंपनियों के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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