India role in Gaza peace : मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच शांति प्रयासों को नई दिशा देने की कोशिश तेज़ हो गई है। टैरिफ डील पर चल रही बातचीत के बीच अमेरिका ने भारत को एक अहम कूटनीतिक भूमिका का प्रस्ताव दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी महत्वाकांक्षी योजना ‘गाज़ा पीस बोर्ड’ में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। इस पहल का उद्देश्य युद्ध के बाद गाज़ा में शासन व्यवस्था और पुनर्विकास की निगरानी करना है।

क्या है ‘गाज़ा पीस बोर्ड’ ?

राष्ट्रपति ट्रंप ने 16 जनवरी को गाज़ा के लिए इस पीस बोर्ड का ऐलान किया था। इसे 20 बिंदुओं वाली एक व्यापक शांति योजना के रूप में पेश किया गया है, जिसे भविष्य में वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए एक संभावित मॉडल माना जा रहा है। इस बोर्ड की अध्यक्षता स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे।

संस्थापक कार्यकारी बोर्ड में कई अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों को शामिल किया गया है, जिनमें—

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर

  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो
  • मध्य-पूर्व के लिए अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ
  • जेरेड कुशनर
  • अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन
  • विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा
  • रॉबर्ट गैब्रियल

व्हाइट हाउस का आधिकारिक पक्ष :

व्हाइट हाउस के अनुसार, इस पहल के तहत दो स्तरों पर काम किया जाएगा।

एक फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट्स समिति, जो युद्धग्रस्त क्षेत्र में शासन व्यवस्था संभालेगी।

एक अलग कार्यकारी बोर्ड, जो सलाहकार भूमिका निभाएगा और पुनर्निर्माण प्रक्रिया की दिशा तय करेगा।

भारत की भूमिका क्यों अहम ?

भारत के इज़रायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ ऐतिहासिक और संतुलित संबंध रहे हैं। भारत जहां इज़रायल का रणनीतिक साझेदार है, वहीं उसने फिलिस्तीन को लगातार मानवीय सहायता प्रदान की है। हालिया संघर्ष के दौरान भी भारत मिस्र के रास्ते गाज़ा को सहायता भेजने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा। ऐसे में गाज़ा पीस बोर्ड में भारत की संभावित भागीदारी को कूटनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

अन्य देशों की सतर्क प्रतिक्रिया :

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पहल के तहत दुनिया के 60 देशों को न्योता भेजा है, जिनमें यूरोपीय देश भी शामिल हैं। हालांकि, कई सरकारें इस प्रस्ताव पर फिलहाल सतर्क प्रतिक्रिया दे रही हैं। कुछ राजनयिकों ने इसे संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर करने वाली पहल के रूप में भी देखा है। वॉशिंगटन ने अभी तक सदस्य देशों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया है, हालांकि आने वाले हफ्तों में औपचारिक घोषणा की संभावना है।

इसके अलावा, एक अलग 11 सदस्यीय गाज़ा एग्जीक्यूटिव बोर्ड का भी गठन प्रस्तावित है, जिसमें तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान, संयुक्त राष्ट्र की सिग्रिड काग, यूएई की मंत्री रीम अल हाशिमी, इज़रायली-साइप्रस अरबपति याकिर गबे, कतर और यूएई के अधिकारी शामिल होंगे।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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