मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी 9 से 10 अप्रैल 2026 तक कतर के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जहां उनका मुख्य उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करना और एलपीजी व एलएनजी आपूर्ति में आ रही बाधाओं का समाधान खोजना है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्रीय संघर्ष और समुद्री मार्गों में अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है।

सूत्रों के अनुसार, कतर से भारत की ऊर्जा निर्भरता अत्यधिक है। देश अपनी कुल एलएनजी जरूरतों का लगभग 50 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है, जिसमें से करीब 40 प्रतिशत कतर से आता है। लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने इस आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कतर सरकार द्वारा प्रमुख प्राकृतिक गैस उत्पादन संयंत्रों को बंद करना और Strait of Hormuz में बाधाओं के कारण भारत की आयात प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ा है।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ईरान से जुड़े हमलों ने कतर की गैस अवसंरचना को नुकसान पहुंचाया। कतरएनर्जी के सीईओ Saad al-Kaabi के अनुसार, इन हमलों से देश की कुल एलएनजी निर्यात क्षमता का लगभग 17 प्रतिशत प्रभावित हुआ है। कतर के 14 एलएनजी संयंत्रों में से दो और गैस-टू-लिक्विड (GTL) सुविधाओं में से एक को भारी क्षति पहुंची है, जिससे करीब 12.8 मिलियन टन प्रतिवर्ष उत्पादन ठप हो गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन सुविधाओं की मरम्मत में तीन से पांच वर्ष तक का समय लग सकता है।

इस बीच, भारत सरकार ने संभावित संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश तेज कर दी है। अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से बड़े पैमाने पर एलएनजी आयात के नए रास्ते बनाए जा रहे हैं। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, खासकर तब जब एलपीजी देश के करोड़ों घरों में मुख्य रसोई ईंधन के रूप में उपयोग होता है।

इसी कड़ी में भारत की विदेश नीति भी सक्रिय हो गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर 9 से 12 अप्रैल के बीच मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर रहेंगे। वह पहले इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए मॉरीशस जाएंगे और उसके बाद UAE में ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे। यह दौरा ईरान संघर्ष और मध्य पूर्व संकट के बाद किसी भारतीय मंत्री की पहली महत्वपूर्ण क्षेत्रीय यात्रा मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात केवल एक क्षेत्रीय संकट नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संतुलन के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में भारत की यह सक्रिय कूटनीति न केवल तत्काल आपूर्ति संकट से निपटने का प्रयास है, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का भी हिस्सा है। आने वाले समय में इन कूटनीतिक प्रयासों के परिणाम भारत की ऊर्जा स्थिरता और आर्थिक संतुलन को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story