भारत बना ‘ग्लोबल इनोवेशन हब’; जानें भारत-वियतनाम के बीच गहराते आर्थिक रिश्तों का विश्लेषण
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत को वैश्विक नवाचार का केंद्र बताया और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को रणनीतिक स्तंभ बनाने की घोषणा की।

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक साझेदारी पर अपना संबोधन देते हुए।
Vietnam President To Lam India visit new : दक्षिण-पूर्वी एशिया की उभरती ताकत वियतनाम और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत के बीच रणनीतिक संबंधों का एक नया स्वर्णिम अध्याय शुरू हो गया है। बुधवार को वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत की अभूतपूर्व प्रगति को वैश्विक स्तर पर मान्यता देते हुए भारत को “दुनिया में विकास और नवाचार का केंद्र” घोषित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राजधानी दिल्ली में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक और संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रपति लाम ने स्पष्ट किया कि हनोई के लिए नई दिल्ली के साथ अपने संबंध केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय हैं। यह दौरा न केवल 50 वर्षों के राजनयिक संबंधों की परिपक्वता को दर्शाता है, बल्कि पिछले एक दशक की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक सशक्त संकल्प भी है।
दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुई वार्ता न केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित रही, बल्कि इसने वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के गंभीर मुद्दों को भी स्पर्श किया। राष्ट्रपति तो लाम ने गर्व के साथ घोषणा की कि भारत और वियतनाम ने अब रक्षा और सुरक्षा सहयोग को अपनी साझेदारी का “रणनीतिक स्तंभ” बनाने का निर्णय लिया है। इस महत्वपूर्ण कदम का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और शक्ति संतुलन को मजबूती प्रदान करना है। इसके साथ ही, भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और डिजिटल परिवर्तन को सहयोग के एक नए 'इंजन' के रूप में परिभाषित किया गया है, जो आने वाले समय में दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को गति प्रदान करेगा।
वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराते हुए वियतनामी राष्ट्रपति ने यूएनसीएलओएस (UNCLOS) 1982 का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय कानूनों के आधार पर समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का पुरजोर समर्थन करते हुए राष्ट्रपति लाम ने आश्वासन दिया कि वियतनाम हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का पूर्ण सहयोग करेगा। उन्होंने व्यापार, निवेश और विशेष रूप से आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि दोनों देश वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच एक-दूसरे के लिए सुरक्षा कवच बन सकें।
इस ऐतिहासिक बैठक का समापन एक सकारात्मक और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण के साथ हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए भव्य स्वागत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति तो लाम ने विश्वास जताया कि भारत और वियतनाम की यह जुगलबंदी साझा चुनौतियों से निपटने में एक मिसाल पेश करेगी। यह मिलन न केवल दो देशों के बीच की भौगोलिक दूरी को कम करता है, बल्कि नवाचार और सुरक्षा के साझा लक्ष्यों के माध्यम से एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की नींव रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस साझेदारी के दूरगामी परिणाम आने वाले दशकों में दक्षिण-पूर्व एशिया की भू-राजनीति को एक नई दिशा देंगे।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
