प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय भूटान दौरे ने भारत-भूटान संबंधों को नई ऊर्जा दी है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग, ऊर्जा विकास और क्षेत्रीय संपर्क को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। भारत ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के लिए मजबूत समर्थन व्यक्त किया और आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम की घोषणा की। वहीं, दोनों देशों के बीच तीन अहम समझौते हुए, जिन्होंने द्विपक्षीय संबंधों में नई मजबूती जोड़ी है।

सबसे बड़ा फैसला 1200 मेगावाट की पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना से जुड़ा रहा। भारत और भूटान ने इस परियोजना के मुख्य बांध ढांचे पर काम फिर से शुरू करने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने इसे शीघ्र पूरा करने का संकल्प लिया, जिससे यह परियोजना दोनों सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना बन जाएगी।

भारत ने भूटान की ऊर्जा परियोजनाओं को वित्तीय सहयोग देने के लिए 40 अरब रुपये के रियायती ऋण की घोषणा की। इस फंड से भूटान में चल रही जलविद्युत परियोजनाओं को नई गति मिलेगी और भारतीय कंपनियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। पुनात्सांगछू नदी पर आधारित यह परियोजना भूटान की बिजली उत्पादन क्षमता में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि लाएगी और दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी को और गहरा करेगी।

प्रधानमंत्री मोदी और भूटान के महामहिम राजा ने 1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-II परियोजना का उद्घाटन भी किया। भगवान बुद्ध के पवित्र पिपराह अवशेषों की उपस्थिति में आयोजित इस समारोह ने भारत-भूटान की आध्यात्मिक और विकासात्मक साझेदारी का प्रतीक प्रस्तुत किया। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने भारत को बिजली निर्यात की शुरुआत की सराहना की, जो आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत असम के हतिसार में एक नई आव्रजन जांच चौकी स्थापित करेगा, जिससे भूटान के गेलेफू क्षेत्र में निवेशकों और यात्रियों की आवाजाही आसान होगी। इसके साथ ही दोनों देशों ने सीमा पार संपर्क को बढ़ाने, एकीकृत चेक पोस्ट स्थापित करने और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी सहमति जताई।

इस यात्रा के दौरान भारत और भूटान ने नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं और संस्थागत सहयोग को लेकर तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच यूपीआई प्रणाली के दूसरे चरण पर भी काम जारी है, जिससे भूटानी नागरिक भारत में क्यूआर कोड स्कैन करके स्थानीय ऐप के जरिए भुगतान कर सकेंगे।

भारत सरकार ने राजगीर में रॉयल भूटान मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा और वाराणसी में भूटानी मंदिर व गेस्ट हाउस निर्माण के लिए भूमि प्रदान करने की घोषणा की। इन पहलों से दोनों देशों के सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों में भी नई मजबूती आने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा ने न केवल भारत-भूटान के पारंपरिक रिश्तों को पुनर्परिभाषित किया, बल्कि ऊर्जा, तकनीक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार भी खोल दिए हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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