जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जहां भारत ने कड़े फैसले लिए हैं, वहीं पाकिस्तान के लिए बुरी खबरें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसकी आर्थिक हालत को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। वर्ल्ड बैंक की नई रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, शाहबाज शरीफ सरकार वार्षिक बजट घाटा कम करने में नाकाम रही है, जिससे जीडीपी के अनुपात में देश का ऋण और बढ़ेगा। सबसे बड़ा संकट यह है कि देश की ग्रामीण आबादी में करीब एक करोड़ लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच सकते हैं। वर्ल्ड बैंक का कहना है कि आने वाले महीनों में गरीबी का स्तर तेजी से बढ़ेगा और करीब 19 लाख लोग गरीबी रेखा से नीचे चले जाएंगे।
कृषि संकट भी गहराया :
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौसम की मार और कड़ी आर्थिक नीतियों के चलते धान, बाजरा जैसी प्रमुख फसलें बर्बाद होंगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा। वर्ल्ड बैंक ने यह भी बताया कि कम मजदूरी वाली सेवाओं और कृषि क्षेत्रों में मंदी के चलते लोगों की दैनिक आमदनी घटेगी और बेरोजगारी बढ़ेगी।
आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक दोनों की निगाहें पाकिस्तान पर :
जहां आईएमएफ ने पाकिस्तान की विकास दर को बेहद कम बताया है, वहीं वर्ल्ड बैंक ने स्पष्ट किया है कि अगर जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो पाकिस्तान एक गहरे आर्थिक और सामाजिक संकट में डूब सकता है। सिर्फ सीमाओं पर नहीं, अब आर्थिक मोर्चे पर भी पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। भुखमरी, गरीबी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे अगर नजरअंदाज किए गए, तो देश की स्थिरता पर बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है।
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