बेंजामिन नेतन्याहू होंगे गिरफ्तार? जाने आखिर क्यों हंगरी के PM ने दिया ऐसा ऐलान
हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मैग्यार ने कहा है कि आईसीसी वारंट के कारण बेंजामिन नेतन्याहू को उनके देश में प्रवेश करते ही हिरासत में लिया जा सकता है।

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
Benjamin Netanyahu Arrest Warrant Hungary : अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब हंगरी के नवनियुक्त प्रधानमंत्री पीटर मैग्यार ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर एक बेहद सख्त और चौंकाने वाला रुख अख्तियार किया। मैग्यार ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि यदि बेंजामिन नेतन्याहू हंगरी की धरती पर कदम रखते हैं, तो उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल पहले से ही युद्ध और अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है। हंगरी के इस कड़े रुख ने न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया के राजनयिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है, जिससे नेतन्याहू के अंतरराष्ट्रीय दौरों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) द्वारा जारी किया गया वह गिरफ्तारी वारंट है, जो साल 2024 में नेतन्याहू के खिलाफ युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोपों में निकाला गया था। स्काई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री पीटर मैग्यार ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करेगी। मैग्यार ने कहा कि जिस भी व्यक्ति के खिलाफ आईसीसी का वारंट सक्रिय है, उसे हंगरी की सीमा के भीतर प्रवेश करते ही कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। दिलचस्प बात यह है कि मैग्यार ने हाल ही में नेतन्याहू को 1956 के आंदोलन की वर्षगांठ पर हंगरी आने का न्योता दिया था, जिस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि निमंत्रण एक औपचारिक प्रक्रिया थी, लेकिन कानून सर्वोपरि है और नेतन्याहू को पहले ही सूचित कर दिया गया है कि हंगरी अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों से पीछे नहीं हटेगा।
हंगरी की राजनीति में यह बदलाव सत्ता परिवर्तन का एक बड़ा परिणाम माना जा रहा है। पिछली विक्टर ओरबान सरकार ने आईसीसी से बाहर निकलने का मन बना लिया था और यह फैसला जून 2026 से लागू होने वाला था। हालांकि, अप्रैल 2026 के चुनावों में ओरबान की 16 साल पुरानी सत्ता को उखाड़ फेंकने वाले पीटर मैग्यार ने पूर्ववर्ती सरकार के उस फैसले को पलटने का निर्णय लिया है। मैग्यार की सरकार अब यूरोपीय संघ और नाटो के साथ अपने संबंधों को पुनः परिभाषित कर रही है और अंतरराष्ट्रीय न्याय प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रही है। भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे बुनियादी मुद्दों पर चुनाव जीतने वाली यह नई सरकार अब वैश्विक स्तर पर 'नियम-आधारित व्यवस्था' का समर्थन कर रही है।
प्रधानमंत्री मैग्यार का यह कदम दर्शाता है कि हंगरी अब अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन में किसी भी बड़े वैश्विक नेता को रियायत देने के पक्ष में नहीं है। नेतन्याहू के लिए यह खबर एक बड़ा झटका है क्योंकि हंगरी जैसे मित्र देशों से मिलने वाला यह सख्त संदेश उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि और राजनयिक पहुंच को सीमित कर सकता है। इस घटनाक्रम ने यह भी साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के वारंट को अब यूरोपीय देश गंभीरता से ले रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इजरायल इस कूटनीतिक चुनौती का सामना कैसे करता है और हंगरी के इस साहसिक फैसले का मध्य पूर्व के तनाव पर क्या प्रभाव पड़ता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
