Russia Snowstorm : रूस के सुदूर पूर्व में स्थित कामचटका प्रायद्वीप इस समय कुदरत के एक भयावह और अभूतपूर्व प्रहार का सामना कर रहा है। ओखोत्स्क सागर से उठे भीषण चक्रवाती दबाव ने समूचे क्षेत्र को बर्फ की गहरी चादर के नीचे दफन कर दिया है। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि ऊंची इमारतों की दूसरी मंजिल तक बर्फ जमा हो गई है और खिड़कियों के कांच तोड़कर यह सफेद आफत लोगों के बेडरूम और लिविंग रूम तक जा पहुंची है। इस विनाशकारी शीतकालीन तूफान ने अब तक दो जिंदगियां छीन ली हैं, जिसके बाद प्रशासन ने शहर में 'आपातकाल' (State of Emergency) लागू कर दिया है।

मौत का मंजर और रिकॉर्ड तोड़ हिमपात :

रूस के आपातकालीन स्थिति मंत्रालय द्वारा साझा किए गए दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की शहर में छतों से अचानक गिरी भारी बर्फ की चपेट में आने से कम से कम दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में एक 63 वर्षीय व्यक्ति शामिल है, जो अपने घर की छत से गिरती बर्फ के मलबे में दब गया था। पैरामेडिक्स के अथक प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

संकट की मुख्य विशेषताएं :

  • हवा की रफ्तार: पूर्वी दिशा से 25 से 30 मीटर प्रति सेकंड की गति से चल रही बर्फीली हवाएं।
  • शून्य दृश्यता: भारी हिमपात और कोहरे के कारण सड़कों पर दृश्यता शून्य हो गई है, जिससे सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह ठप्प है।
  • तापमान का खेल: 0 से 2 डिग्री सेल्सियस के बीच झूलता तापमान बर्फ को गीला और भारी बना रहा है, जिससे इमारतों के गिरने का खतरा बढ़ गया है।

प्रशासनिक सख्ती और बचाव कार्य :

मेयर येवगेनी बेल्यायेव ने पहली मौत की पुष्टि होते ही शहर में अतिरिक्त संसाधनों को तैनात करने के लिए आपातकाल का आदेश दिया। उन्होंने संपत्ति प्रबंधन कंपनियों (Property Management Companies) की कड़ी आलोचना की है, जिन्होंने समय रहते छतों से बर्फ हटाने के बजाय तूफान के थमने का इंतजार किया। इस लापरवाही को आपराधिक मानते हुए प्रशासन अब सख्त रुख अख्तियार कर रहा है।

रूस का आपातकालीन मंत्रालय वर्तमान में उन बुजुर्गों और अकेले रह रहे नागरिकों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहा है, जिनके घरों के दरवाजे और खिड़कियां कई फीट ऊंची बर्फ की दीवारों के पीछे गायब हो चुके हैं। बचावकर्मी फावड़ों और भारी मशीनों की मदद से आशियानों के भीतर फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं।




चेतावनी और भविष्य का खतरा :

मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में खतरा और बढ़ सकता है। गीली बर्फ न केवल सड़कों को फिसलन भरा बना रही है, बल्कि बिजली की लाइनों और पेड़ों के लिए भी 'टाइम बम' साबित हो रही है। आपातकालीन मामलों के मंत्री सर्गेई लेबेदेव ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऊंची इमारतों के पास से गुजरने से बचें, क्योंकि बढ़ता तापमान छतों पर जमी बर्फ को ढीला कर रहा है, जो कभी भी मौत बनकर नीचे गिर सकती है।

यह आपदा न केवल रूस के बुनियादी ढांचे की परीक्षा ले रही है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के उन चरम प्रभावों को भी उजागर कर रही है जो अब सुदूर क्षेत्रों में रिकॉर्ड तोड़ तबाही मचा रहे हैं।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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