अफगानिस्तान में पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक से हड़कंप; मानवाधिकार संगठनों ने मांगी स्वतंत्र जांच!
पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में हुए हवाई हमलों में नागरिकों की मौत के बाद इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने जेनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन की आशंका जताई है।

अफगानिस्तान के सीमावर्ती प्रांत में पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले के बाद इमारतों के ऊपर आसमान में उठता काला धुआं।
Pakhtika Paktya Bombing : मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में उस समय एक बेहद गंभीर और तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब अफगानिस्तान के सीमावर्ती प्रांतों में पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा की गई भीषण एयर स्ट्राइक में भारी तबाही की तस्वीरें सामने आईं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस अचानक किए गए सैन्य हमले में बड़े पैमाने पर निर्दोष नागरिकों के हताहत होने पर गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया है। रविवार की रात हुए इस विनाशकारी हवाई हमले ने न केवल कई मासूम जिंदगियों को लील लिया, बल्कि दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच कूटनीतिक और सैन्य गतिरोध को एक बेहद खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। तालिबान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 36 नागरिकों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि 163 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है।
इस भयावह सैन्य घटनाक्रम के मुख्य विवरणों पर नजर डालें तो पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर बमबारी की। इस अप्रत्याशित हमले में न केवल भारी जनहानि हुई है, बल्कि तीन बड़े आवासीय घर भी पूरी तरह जमींदोज हो गए, जिसके मलबे में कई परिवारों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस हवाई हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे पाकिस्तान का एक "कायराना आक्रमण" करार दिया है। उन्होंने इस्लामाबाद पर अफगानिस्तान के खिलाफ एक अत्यंत आक्रामक और अदूरदर्शी नीति अपनाने का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि नागरिक क्षेत्रों पर इस तरह की बमबारी मानवता के खिलाफ एक अक्षम्य अपराध है, जिसे किसी भी संप्रभु राष्ट्र द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
विधिक और अंतरराष्ट्रीय वैधानिकता के दृष्टिकोण से, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (IHRF) ने इस पूरी घटना को वैश्विक कानूनों के तराजू पर तौलते हुए बेहद गंभीर टिप्पणियां की हैं। मानवाधिकार संगठन ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि नागरिक रिहायशों और राहत कार्यों में जुटे संगठनों के ठिकानों पर इस तरह के घातक हमले सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (IHL) के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आते हैं। संगठन ने रेखांकित किया कि यह सैन्य अभियान भेदभाव रहित कार्रवाई, आनुपातिकता और युद्ध के समय बरती जाने वाली आवश्यक सावधानी जैसे स्थापित अंतरराष्ट्रीय मानकों की पूरी तरह अनदेखी करता है। आईएचआरएफ के विधिक विशेषज्ञों के अनुसार, जेनेवा कन्वेंशन और इसके अतिरिक्त प्रोटोकॉल के तहत युद्ध के समय भी आम नागरिकों या मानवीय सहायता कर्मियों पर जानबूझकर किया गया हमला एक युद्ध अपराध की श्रेणी में माना जा सकता है। इसी आधार पर संगठन ने पाकिस्तान सरकार से इस पूरे सैन्य ऑपरेशन के कानूनी औचित्य, खुफिया सूचनाओं की सत्यता, लक्ष्य निर्धारण की आंतरिक प्रक्रिया और इन परिस्थितियों को लेकर वैश्विक मंच पर एक पारदर्शी व आधिकारिक स्पष्टीकरण पेश करने की सख्त मांग की है।
इस अंतरराष्ट्रीय विधिक दबाव के साथ ही मानवाधिकार संस्था ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य वैश्विक मंचों से इस संवेदनशील मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। आईएचआरएफ ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए एक स्वतंत्र तथ्य-खोज मिशन (Fact-Finding Mission) भेजा जाना चाहिए और सभी साक्ष्यों का निष्पक्ष दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए ताकि दोषियों की जवाबदेही तय की जा सके। इसके साथ ही, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने भी इस हवाई हमले पर अपनी तीव्र प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे अफगानिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता और अखंडता पर एक सीधा प्रहार बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक की यह घटना दक्षिण एशिया के इस अशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा आघात है। अफगानिस्तान की संप्रभु धरती पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई आने वाले दिनों में न केवल द्विपक्षीय व्यापार और कूटनीति को प्रभावित करेगी, बल्कि सीमा पर एक नए सशस्त्र संघर्ष की पृष्ठभूमि भी तैयार कर सकती है। वैश्विक समुदाय और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए अब यह अनिवार्य हो गया है कि वे इस मानवीय संकट पर मूकदर्शक बने रहने के बजाय दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करें। इस घटना का दीर्घकालिक प्रभाव यह होगा कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच नहीं कराई गई, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लाखों नागरिकों के मानवाधिकार और उनकी सुरक्षा हमेशा के लिए दांव पर लग जाएगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
