अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को टोल-फ्री घोषित करने के बाद ईरान ने जहाजों से सुरक्षा और सेवा शुल्क वसूलने की बात कही है।

US Iran Hormuz Strait deal : वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच हुआ ऐतिहासिक शांति समझौता एक बार फिर गहरे सस्पेंस के भंवर में फंस गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को हमेशा के लिए 'टोल फ्री' घोषित किए जाने के महज कुछ ही घंटों बाद तेहरान ने एक ऐसा चौंकाने वाला बयान जारी किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय बाजार में खलबली मचा दी है। ईरान सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि होर्मुज के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से कोई 'टोल' तो नहीं वसूला जाएगा, लेकिन वहां से निकलने के लिए एक विशेष 'सुविधा शुल्क' यानी फीस जरूर ली जाएगी। ईरान का यह नया रुख ट्रंप प्रशासन के उस बड़े दावे को सीधी चुनौती दे रहा है जिसमें उन्होंने महीनों के गतिरोध के बाद वैश्विक व्यापार को पूरी तरह कर-मुक्त करने की बात कही थी।

इस पूरे विवाद की शुरुआत रविवार, 14 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस ऐतिहासिक ऐलान से हुई थी जिसमें उन्होंने वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक व्यापक डील पूरी होने का दावा किया था। द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक विशेष इंटरव्यू में ट्रंप ने बेहद आश्वस्त होकर कहा था कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते को खोल दिया गया है और अब यह हमेशा के लिए पूरी तरह टोल-फ्री रहेगा। उन्होंने इसे अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी के खात्मे और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को सुरक्षित करने की दिशा में महीनों की सैन्य व कूटनीतिक लड़ाई के बाद मिली एक अभूतपूर्व कामयाबी बताया था। राष्ट्रपति ट्रंप का मानना था कि इस शांति समझौते से न केवल तेल की आपूर्ति सुचारू होगी, बल्कि मध्य पूर्व में मंडरा रहे एक विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध का खतरा भी काफी हद तक टल जाएगा।

हालांकि, ईरान ने बड़ी ही चतुराई से इस कूटनीतिक जीत के जश्न के बीच अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तकनीकी पहलुओं का हवाला देते हुए पासा पलट दिया है। एनवाईटी (NYT) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने स्वीकार किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से सीधे तौर पर टोल की वसूली करना पूरी तरह अवैध है। इसी कानूनी अड़चन से बचने के लिए ईरान ने अब 'टोल' शब्द का नाम बदलकर इसे 'सेवा शुल्क' का नया नाम दे दिया है। ईरान का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक भले ही टोल प्रतिबंधित हो, लेकिन समुद्री मार्ग पर दी जाने वाली कुछ विशेष सुरक्षा और तकनीकी सेवाओं के बदले फीस ली जा सकती है। हालांकि, ईरान ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह जहाजों को कौन सी अतिरिक्त सेवाएं प्रदान करने जा रहा है, क्योंकि इस पूरे संकट और युद्ध से पहले यहां से गुजरने के लिए किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाता था।

ईरान के इस नए पैंतरे ने कूटनीतिक गलियारों में एक नई बहस और अनिश्चितता को जन्म दे दिया है। रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर मनमाना शुल्क वसूलने में कामयाब रहता है, तो यह वैश्विक समुद्री व्यापार के इतिहास में एक नया और बेहद खतरनाक उदाहरण स्थापित कर देगा। होर्मुज स्ट्रेट से हर दिन दुनिया का एक-चौथाई कच्चा तेल गुजरता है, ऐसे में किसी भी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय बोझ या कूटनीतिक गतिरोध वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालेगा। ट्रंप के 'फ्री ट्रेड' के दावों और ईरान की 'फीस' वसूली की इस नई जिद के बीच अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका इस समझौते को बचाए रखने के लिए तेहरान की इस नई शर्त को स्वीकार करता है या फिर होर्मुज की लहरों पर एक बार फिर तनाव का नया दौर शुरू होने वाला है।

Updated On 16 Jun 2026 3:29 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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