18 साल बाद इतिहास रचा गया: भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता अंतिम, 2 अरब लोगों के लिए खुले नए बाजार
भारत और यूरोपीय संघ ने 18 वर्षों बाद मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया है। 27 जनवरी 2026 को घोषित इस FTA के तहत 90% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ कटौती होगी, जिससे 2 अरब लोगों के बाजार खुलेंगे। समझौते से भारत के निर्यात, निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

टैरिफ में ऐतिहासिक कटौती, निर्यात को रफ्तार और किसानों की सुरक्षा—भारत-EU व्यापार रिश्तों में नया अध्याय
भारत–EU FTA: लंबे इंतज़ार का निर्णायक क्षण
नई दिल्ली।
करीब 18 वर्षों की लंबी बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement—FTA) को अंतिम रूप देकर वैश्विक व्यापार परिदृश्य में एक बड़ा मोड़ ला दिया है। 27 जनवरी 2026 को घोषित इस समझौते के तहत दोनों पक्षों के बीच 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ में कटौती की जाएगी। इस कदम से लगभग 2 अरब उपभोक्ताओं के लिए बाजार खुलेंगे और भारत-EU आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
समझौते की मुख्य शर्तें: व्यापार के नए दरवाज़े
घोषित समझौते के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- 90% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ कटौती, जिससे व्यापार लागत में उल्लेखनीय कमी
- सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को लेकर व्यापक प्रावधान
- भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा, संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण
- कपड़ा, इंजीनियरिंग और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा
अगले 5 वर्षों में निर्यात $150 अरब तक दोगुना होने की संभावना
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार देते हुए कहा कि यह भारत की आर्थिक ताकत और वैश्विक विश्वसनीयता को दर्शाता है।
भारत के लिए क्या बदलेगा?
इस FTA से भारतीय उद्योगों को यूरोपीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। विशेष रूप से:
- कपड़ा और परिधान: शुल्क घटने से भारतीय उत्पाद यूरोप में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे
- इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट्स: निर्यात अवसरों का विस्तार
- आईटी और सेवाएं: पेशेवरों के लिए नए अवसर और आसान बाजार पहुंच
- स्टार्टअप और MSME: निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा
सरकारी आकलन के अनुसार, समझौते से रोज़गार सृजन और औद्योगिक उत्पादन में भी तेज़ी आएगी।
किसानों और डेयरी क्षेत्र को संरक्षण
समझौते में भारतीय किसानों के हितों को विशेष रूप से सुरक्षित रखा गया है। कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में:
- आयात पर आवश्यक सुरक्षा उपाय
- घरेलू उत्पादकों पर प्रतिकूल असर से बचाव
- चरणबद्ध और संतुलित बाजार खोलने की रणनीति
सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रावधान से किसानों की आय और आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
2022 में फिर शुरू हुई थी बातचीत
भारत-EU FTA पर बातचीत पहली बार 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेदों के कारण प्रक्रिया ठप पड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2022 में वार्ता पुनः शुरू हुई, जिसमें:
- डिजिटल व्यापार
- डेटा सुरक्षा
- निवेश संरक्षण
- हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार
जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई। निरंतर दौर की वार्ताओं के बाद अब यह समझौता साकार हो पाया है।
चुनौतियां अभी भी बाकी
हालांकि समझौता ऐतिहासिक है, लेकिन कुछ चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं:
- EU का कार्बन बॉर्डर टैक्स (CBAM), खासकर स्टील और ऊर्जा-गहन उद्योगों पर असर
- नियामकीय मानकों और अनुपालन लागत
- हरित नियमों को लेकर उद्योगों की तैयारी
सरकार का कहना है कि इन मुद्दों पर संवाद और सहयोग के जरिए समाधान निकाले जाएंगे।
कानूनी और आधिकारिक पहलू
- FTA को दोनों पक्षों की वैधानिक स्वीकृति मिलना आवश्यक
- चरणबद्ध क्रियान्वयन के लिए संयुक्त निगरानी तंत्र
- विवाद निपटान के लिए संस्थागत ढांचा
इन प्रावधानों से समझौते के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाएगा।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता न केवल व्यापारिक आंकड़ों का विस्तार है, बल्कि यह रणनीतिक साझेदारी की मजबूती का प्रतीक भी है। 18 वर्षों के इंतज़ार के बाद हुआ यह समझौता भारतीय निर्यात, निवेश और रोज़गार के लिए नए अवसर लेकर आया है। आने वाले वर्षों में इसका असर अर्थव्यवस्था, उद्योग और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और सुदृढ़ करेगा।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
