अक्टूबर 2025 में रटगर्स यूनिवर्सिटी के न्यू ब्रंसविक कैंपस में एक कार्यक्रम हुआ जिसने काफी चर्चा और विवाद पैदा किया। इस कार्यक्रम का नाम था "Hindutva in America: A Threat to Equality and Religious Pluralism"। इसे रटगर्स के सेंटर फॉर सिक्योरिटी, रेस एंड राइट्स (CSRR) ने आयोजित किया था। कार्यक्रम का मकसद था अमेरिका में "हिंदुत्व" की भूमिका और उसके प्रभाव पर बात करना। लेकिन इस आयोजन से कई हिंदू छात्रों और संगठनों ने नाराज़गी जताई। उनका कहना था कि कार्यक्रम में हिंदू धर्म को गलत तरीके से दिखाया गया और हिंदुत्व को खतरे के रूप में पेश किया गया।


कार्यक्रम के दिन कई हिंदू छात्रों और समुदाय के लोगों ने शांतिपूर्वक विरोध किया। उन्होंने रटगर्स यूनिवर्सिटी के आसपास "Hindu rights are human rights", "Hate has no place at Rutgers" और "American Hindus are not foreign agents" जैसे नारे लिखे पोस्टर और बैनर लगाए। छात्रों का कहना था कि इस कार्यक्रम से वे असुरक्षित महसूस कर रहे थे और विश्वविद्यालय ने उनकी सुरक्षा की चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया। विरोध के दौरान कुछ समर्थकों द्वारा उनकी पहचान उजागर करने की कोशिश भी हुई, जिसे “डॉक्सिंग” कहते हैं। इस घटना से छात्रों में भय और असहजता बढ़ी।


यह कार्यक्रम एक रिपोर्ट के विमोचन के आयोजन के तौर पर हुआ था, जिसका शीर्षक भी "हिंदुत्व इन अमेरिका" था। इस रिपोर्ट में कुछ अमेरिकी-आधारित हिंदू संगठनों को विदेशी एजेंटों की तरह दिखाने की कोशिश की गई, साथ ही ये भी कहा गया कि इनसे संबंधित होमवाले तत्व राष्ट्रीय या धार्मिक आतंकवाद को बढ़ावा दे सकते हैं। कार्यक्रम में शामिल पैनल में कोई भी प्रैक्टिसिंग हिंदू नंबर नहीं था, जिससे हिंदू समुदाय को यह बताने का मौका नहीं मिला कि हिंदुत्व और हिंदू धर्म के बीच क्या फर्क है।


ऐसे में पैनल में शिरकत करने वाले पैनलिस्ट ने हिंदुत्व को राजनीतिक उग्रता के रूप में पेश किया, जो हिंदू धर्म के लिए अपमानजनक था। कार्यक्रम के दौरान हिंदू छात्रों के सवालों को अनसुना किया गया, जिससे उनमें असंतोष और घोर निराशा फैली। विवाद बढ़ने के बाद चार अमेरिकी सांसदों, सुहास सुब्रमण्य, श्री थानेदार, सैनफोर्ड बिशप और डॉ. रिच मैकॉमिक ने रटगर्स यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष को एक पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि "हिंदुत्व" और "हिंदू धर्म" में फर्क समझना जरूरी है ताकि किसी धर्म के बारे में गलत धारणा न बने।


सांसदों ने यह भी आग्रह किया कि विश्वविद्यालय इस कार्यक्रम के लिए अपनी आधिकारिक पहचान का इस्तेमाल न करे, जिससे किसी पक्षपात या छात्रों में असुरक्षा की भावना न फैले। रटगर्स विश्वविद्यालय में यह विवाद न केवल एक शैक्षिक बहस का विषय बना, बल्कि अमेरिकी हिंदू समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण संघर्ष का बिंदु भी बन गया। यह मुद्दा दिखाता है कि किस प्रकार शैक्षणिक संस्थान और बहसें कभी-कभी धार्मिक समुदायों की भावनाओं के साथ जुड़ी संवेदनशीलताओं को ध्यान में नहीं रखतीं।


अब तक रटगर्स प्रशासन ने इस विवादित घटना और सांसदों के पत्र पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हिंदू छात्रों ने सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन अभी तक इस बारे में किसी भी ठोस सुरक्षा प्रावधान की घोषणा विश्वविद्यालय की ओर से नहीं हुई है।




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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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