Friedrich Merz Iran Statement : पश्चिम एशिया के अशांत गलियारों से निकलकर एक कूटनीतिक बवंडर अब यूरोप की दहलीज तक जा पहुंचा है। ईरान में पिछले दो हफ्तों से जारी भीषण जन-आंदोलन के बीच, तेहरान और बर्लिन के संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज द्वारा ईरानी सरकार के पतन की भविष्यवाणी करने वाले बयान ने आग में घी का काम किया है। इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने न केवल पलटवार किया, बल्कि कड़े शब्दों में चांसलर को नसीहत देते हुए कहा कि जर्मनी को मानवाधिकारों पर उपदेश देने से पहले 'थोड़ी शर्म' करनी चाहिए।

विवाद की पृष्ठभूमि: आंदोलन और जर्मन चांसलर की भविष्यवाणी

ईरान इस समय भीषण आर्थिक संकट और सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रहा है। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ जारी इस आंदोलन ने अब तक करीब 2,000 लोगों की जान ले ली है। इसी तनावपूर्ण माहौल में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने टिप्पणी की थी कि खामेनेई प्रशासन अपने 'अंतिम दिनों' की गिनती कर रहा है। इस बयान को ईरान ने अपनी संप्रभुता पर हमला और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है।

ईरान का करारा प्रहार: 'दोहरे मापदंडों' का पर्दाफाश

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए जर्मनी की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने जर्मनी के रुख को 'तर्कहीन' बताते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर घेरा:

  • गाजा और मानवाधिकार: अराघची ने आरोप लगाया कि जर्मनी एक ओर मानवाधिकारों की दुहाई देता है, वहीं दूसरी ओर गाजा में हो रहे 'नरसंहार' में इजरायल का पूर्ण समर्थन करता है। उन्होंने सवाल किया कि 70 हजार फिलिस्तीनियों की मौत पर जर्मनी मौन क्यों है?
  • आतंकवाद पर रुख: ईरानी मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि जब ईरान अपने पुलिस अधिकारियों की हत्या करने वाले दंगाइयों पर कार्रवाई करता है, तो जर्मनी उसे 'हिंसा' कहता है, लेकिन इजरायल द्वारा ईरानी घरों पर की गई बमबारी की वह प्रशंसा करता है।
  • हस्तक्षेप बंद करने की चेतावनी: अराघची ने कड़े लहजे में कहा, "हम सब पर एक एहसान करो... थोड़ी शर्म करो। क्षेत्र में अपना गैरकानूनी हस्तक्षेप और आतंकवाद को समर्थन देना बंद करो।"

धरातल की हकीकत: प्रतिबंधों के बीच सिसकता ईरान

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी 'रॉयटर्स' के अनुसार, मंगलवार (13 जनवरी 2026) को ईरानी प्रशासन ने सूचना तंत्र पर लगी पाबंदियों में मामूली ढील दी है। निवासियों को अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल करने की अनुमति तो दी गई है, लेकिन इंटरनेट और टेक्स्ट मैसेजिंग सेवाएं अब भी पूरी तरह से ठप हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि ईरानी सरकार बाहरी दुनिया से सूचनाओं के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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