अटलांटिक महासागर में अर्जेंटीना से रवाना क्रूज़ शिप MV Hondius पर हंता वायरस का प्रकोप सामने आया है। आठ मामलों में तीन मौतें और एक गंभीर मरीज सहित कई लोगों को यूरोप में भर्ती कराया गया। ब्रिटिश डॉक्टर की हालत अब स्थिर बताई गई है। WHO ने जोखिम कम बताया है।

अटलांटिक महासागर में अर्जेंटीना से रवाना हुई क्रूज़ शिप MV Hondius में हंता वायरस के प्रकोप ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। जहाज पर सामने आए संक्रमण के मामलों के बीच एक ब्रिटिश डॉक्टर सहित कई मरीजों को आपातकालीन रूप से निकालकर यूरोप के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। स्पेन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि की है कि गंभीर हालत में रहे इस डॉक्टर की स्थिति अब स्थिर है और उन्हें बेहतर उपचार के लिए नीदरलैंड स्थानांतरित किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, यह जहाज वर्तमान में केप वर्डे के समुद्री क्षेत्र में है, जहाँ इसे संक्रमण के कई मामले सामने आने के बाद मोड़ दिया गया था। स्पेनिश स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि डॉक्टर को पहले कैनरी आइलैंड्स ले जाने की योजना थी, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार के बाद उन्हें सीधे नीदरलैंड भेजा जा रहा है। इस पूरी आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), स्पेन और डच स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है।



WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि मरीजों को सुरक्षित रूप से स्थानांतरित किया जा रहा है और वर्तमान स्थिति में सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम कम है। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, जहाज से जुड़े आठ मामले सामने आए हैं, जिनमें तीन लोगों की मौत हो चुकी है, एक मरीज की हालत गंभीर है, जबकि तीन अन्य में हल्के लक्षण पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमित व्यक्तियों में 6 अप्रैल से 28 अप्रैल के बीच शुरुआती लक्षण दिखाई दिए, जिनमें बुखार और पाचन संबंधी समस्याएँ प्रमुख थीं। कुछ मामलों में संक्रमण तेजी से बढ़कर निमोनिया, श्वसन तंत्र की गंभीर विफलता और शॉक जैसी खतरनाक स्थितियों में बदल गया।

हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों से फैलने वाला एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरस है। यह मनुष्यों में सीधे एक-दूसरे से नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित कृंतकों के मल, मूत्र या लार से दूषित वातावरण में सांस लेने या संपर्क में आने से संक्रमण होता है। शुरुआती चरण में यह सामान्य फ्लू जैसे लक्षण देता है, लेकिन बाद में यह फेफड़ों को प्रभावित कर घातक स्थिति उत्पन्न कर सकता है, जिसे हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम कहा जाता है। जहाजों पर ऐसे संक्रमण का खतरा अक्सर बंद वातावरण, सीमित स्वच्छता और माल या आपूर्ति के माध्यम से कृंतकों की मौजूदगी के कारण बढ़ जाता है। वर्तमान स्थिति में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ लगातार निगरानी और नियंत्रण उपायों में जुटी हुई हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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